Shambhavi Nagar के जज्बे को पुलिस ने किया सलाम, FIR होगी दर्ज, हैवान टीचर जल्द होगा गिरफ्तार

Shambhavi Nagar शांभवी नागर देश की सबसे बहादुर बेटी बन चुकीं हैं। उन हर लड़कियों की आइडियल बन चुकी हैं जो चुपचाप जुल्म सहती रहीं हैं। पर अब नहीं सहेंगी। अब खुलकर बोलेंगी। शांभवी अब उनकी हिम्मत बन चुकी हैं जो मजबूत होकर भी अपनों की दिखावे की इज्जत की खातिर कमजोर बन जातीं हैं। पर अब नहीं होगा। बहादुर बेटियों की फिल्में देखकर भी जो ये सोचकर चुप रह जातीं थीं कि ये सिर्फ रील लाइफ में ही हो सकता है रियल लाइफ में नहीं। उनके लिए शांभवी अब रियल लाइफ आइकन बन चुकी हैं। क्राइम हेल्पलाइन भी आपके साथ हर पल हर तरह से साथ है और आपकी आवाज में आवाज बनेगा।

चैतन्य नागर Chaitanya Nagar सभी बेटियों के आदर्श आइकन पिता बन चुके हैं

शांभवी के पिता चैतन्य नागर Chaitanya Nagar अब आइडियल पिता बन चुके हैं। ऐसे पिता जो अपनी बेटी की आवाज को समाज की खोखली इज्जत के सामने चुप नहीं कराते बल्कि सच का सामना करने की हिम्मत दिखाते हैं। ऐसे पिता जो यह नहीं सोचते कि हमारे एक के आगे आने से पूरा समाज थोड़ी न बदल जाएगा, बल्कि यह सोचते हैं हम एक कदम बढ़ेंगे तो दुनिया के कदम हमारे साथ आएंगे। आखिरकार सकारात्मक सोच का परिणाम सामने आ ही गया और यूपी पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे शांभवी व चैतन्य नागर की पोस्ट का संज्ञान ले लिया है।

यूपी पुलिस जल्द करेगी आरोपी गणित के टीचर को गिरफ्तार

Sunil Dua Teacher In Allahabad

एक बेटी और पिता की हिम्मत को UP Police यूपी पुलिस के अधिकारियों ने भी सलाम किया है। आरोपी गणित का टीचर सुनील दुआ जल्द ही गिरफ्तार हो सकता है। यह टीचर अभी भी प्रयागराज के अशोक नगर व जॉर्ज टाउन में पढ़ाता है। अब प्रयागराज (इलाहाबाद) के सिविल लाइंस थाने की पुलिस मामले का संज्ञान लेकर पॉक्सो एक्ट (Pocso Act) समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर रही है। प्रयागराज के एसपी सिटी बृजेश श्रीवास्तव ने Crime Helpline को बताया कि एफआईआर दर्ज करने की कार्र‌वाई हो रही है और आरोपी टीचर को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। एसपी सिटी ने बताया कि यह मामला काफी संवेदनशील है और इस पर पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है।

ध्यान रहे : अगर भरोसेमंद टीचर, पारिवारिक सदस्य, पुलिस या अन्य व्यक्ति करे असॉल्ट तो Pocso Act की धारा-9 में होती है रिपोर्ट

पॉक्सो एक्ट को लेकर देशभर में पुलिस अभी ज्यादा अवेयर नहीं है। इसीलिए जब ऐसा केस आता है तो पुलिस अकसर पॉक्सो एक्ट की धारा 7 व 8 में ही रिपोर्ट दर्ज कर लेती है। मगर आपको बता दें कि पॉक्सो एक्ट-2012 की धारा-9 में साफ कहा गया है कि अगर असॉल्ट करने का आरोपी कोई भरोसे का शख्स जैसे पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मचारी, स्कूल टीचर या अस्पताल या घर का ही सदस्य है, तो उसे ज्यादा सजा मिलनी चाहिए। इसके तहत भरोसे के व्यक्ति पर अगर असॉल्ट करने का आरोप है तो उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा-9 लगेगी और धारा-10 के तहत उसे कम से कम 5 साल की सजा या 7 साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है।

पॉक्सो एक्ट Pocso Act की धारा-7 व 8 लगाने से सिर्फ 3 से 5 साल तक की ही होती है सजा

पॉक्सो एक्ट के तहत अगर कोई सामान्य व्यक्ति किसी बच्चेे के साथ असॉल्ट करता है तब उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 7 व 8 में मामला दर्ज होता है। धारा-7 में बच्चे के प्राइवेट पार्ट को टच करके असॉल्ट करने का जिक्र है। वहीं, धारा-8 में इसमें सजा 3 साल से कम नहीं और अधिकतम 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मगर जैसे कोई भरोसेमंद व्यक्ति ऐसा करता है तो उसे ज्यादा सजा मिलने का प्रावधान है।

Shambhavi Nagar की हिम्मत को सलाम करते हुए इंस्टाग्राम पर उसके लिखे पोस्ट का हिंदी अनुवाद 

साभार : फेसबुक

‘मुझे याद है मुझे हमेशा बड़ों की इज़्ज़त करना सिखाया गया। ‘बड़े हैं’ – इस कारण कई लोग उस सम्मान के अधिकारी बन जाते हैं जिसके वे पात्र नहीं हैं। हमारे माता-पिता ने हमें अजनबियों से कुछ भी लेने से मना किया, जिन लड़कों से हम मिलते थे, उनसे सावधान रहने को कहा, लेकिन जिस व्यक्ति ने मेरा बचपन छीन लिया वह व्यक्ति वह था जिसपर मेरे माता-पिता ने भरोसा करके मुझे पढ़ाने के लिए नियुक्त किया। मैं गणित में हमेशा से कमज़ोर थी और मुझे अच्छा ग्रेड चाहिए था, इसके लिए वह आया था – सफेद पूरी बाँह की शर्ट, फॉर्मल पैंट, अजीब-सी मुस्कान और चोरों वाली चाल-ढाल।

उसने 12 साल की बच्ची का कई तरह से ब्रेनवॉश करना शुरू किया। अगर आप ‘ग्रूमिंग’ टर्म जानते हों तो यह उसका क्लासिक केस है। यह आदमी पचास साल का प्रौढ़ था, मतलब ऐसा जिस पर आप उसकी उम्र के नाते भी सहज भरोसा कर लेंगे।

आगे घटना ऐसे बढ़ी कि मैं बाथरूम में उल्टियाँ कर रही थी क्योंकि उसने मेरे ऊपर इस तरह सेक्सुअल हमला किया था कि मैं उस घटना की स्मृति को भी दोहराना नहीं चाहती। यह सब वह दो महीने तक करता रहा, जब तक कि उसे ट्यूशन से हटा नहीं दिया गया।

मेरी कहानी जटिल, उलझी हुई और ख़ून में सनी हुई है। इसमें ख़ून से दस्तख़त किए हुए पत्र हैं, बाइबिल पर हाथ रखकर खाई हुई कसमें हैं और किसी को बताने पर आत्महत्या की धमकियाँ हैं। उसका नाम सुनील दुआ है जिसने अपने गन्दे स्पर्श और घिनौनी नजरों से मेरा बचपन बरबाद किया। यहाँ तक कि अब मैं किसी लड़के को नहीं चूम सकती क्योंकि मेरे सामने उसका गंदा चेहरा आ जाता है। अब मेरे लिए चुम्बन किसी कविता की तरह सुंदर नहीं हो सकता, हो ही नहीं सकता। इन बातों को पाँच साल बीत चुके हैं। लेकिन मैं आज भी बेहद यंत्रणा में हूँ। मैं उन छोटी बच्चियों के प्रति जिम्मेदारी महसूस करती हूँ जो आगे इस व्यक्ति के घिनौनेपन का शिकार बन सकती हैं।

अगर मेरी इस बात से किसी को लगता है कि मैं अटेंशन सीकर हूँ तो वह मुझे तुरन्त अमित्र और ब्लॉक कर दे।
दोषी व्यक्ति आज भी अशोक नगर और जॉर्ज टाउन में क्लास ले रहा है, एल चीको जा रहा है, सामान्य ज़िंदगी जी रहा है, जैसे कि ज़्यादातर यौन राक्षस करते हैं।

ईश्वर पर मै भरोसा नहीं करती, फिर भी मैंने उससे प्रार्थना की है कि उसे सज़ा मिले। मैंने सालों तक अपना मुँह बन्द रखा। लेकिन अब समय आ गया है। ‘दोस्त, मेरी इन बेड़ियों को तोड़ दो और मैं बताऊँगी कि मेरे भीतर कितनी भयंकर ज्वाला धधक रही है।

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