उसने गंदे स्पर्श से मेरा बचपन बर्बाद किया, उस गणित के टीचर के चेहरे से उतारा नकाब

उसका नाम सुनील दुआ है जिसने अपने गन्दे स्पर्श और घिनौनी नजरों से मेरा बचपन बरबाद किया। यहांं तक कि अब मैं किसी लड़के को नहीं चूम सकती क्योंकि मेरे सामने उसका गन्दा चेहरा आ जाता है। अब मेरे लिए चुम्बन किसी कविता की तरह सुंदर नहीं हो सकता, हो ही नहीं सकता।
-एक बेटी की आवाज Shambhavi Nagar

आप भी बनें शाम्भवी Shambhavi Nagar की आवाज ..अगर आपके साथ भी कभी ऐसा कुछ हुआ हो तो जरूर उठाएं आवाज…क्योंकि एक दबीं आवाज जुल्म को हजार गुना बढ़ा देती है। आज नहीं तो कभी नहीं। अगर आवाज नहीं उठाया तो न जानें कितनी बेटियां गुमसुम जिंदगी गुजारने को मजबूर रह जाएंगी।

फेसबुक पर एक बेटी की हिम्मत को पढ़ा। एक पिता के पहाड़ जैसे जज्बात को महसूस किया। पहली बार। क्राइम की बहुत खबरें पढ़ीं होंगी आपने। सस्पेंस फिल्में भी देखीं होंगी। एक लड़की की बहादुरी देखी होगी। हिम्मत देखी होगी। मगर मैंने तो शायद ही इतनी हिम्मत न तो कभी देखी थी और न ही फिल्म कहानियों में ही सुन पाया था। फेसबुक पर इस पोस्ट को पढ़ते हुए दो फिल्में दिमाग में घूम गईं। पहली थी आलिया भट्‌ट और रणदीप हुड्‌डा की हाईवे (Highway) और दूसरी अमिताभ बच्चन वाली पिंक (Pink)। दोनों फिल्मों में एक लड़की अपने प्रति हुए असॉल्ट की आवाज उठाते हुए देखी गई मगर उसमें घरवाले कहीं न कहीं दूरी बनाते हुए या फिर गड़े मुर्दे को उखाड़ने वाली बात कहकर चुप रहने की बात कर देते हैं।

मगर ये मामला हमारे समाज की असली हकीकत को दर्शाता हुआ है। ऐसा नहीं कि यह केस बहुत अलग है और कॉमन नहीं है बल्कि ये आमतौर पर हर तीसरे या चौथे बच्चे की कहानी है। इनमें आपका बच्चा भी हो सकता है। आपकी बेटी या बेटा भी। इसलिए इस आवाज में अपनी आवाज भी बुलंद करिए। वक्त आ गया है कि समाज से भरोसे वाले ऐसे हैवान को खत्म किया जाए। क्योंकि ये उस बहरुपिये की तरह होते हैं जो हमेशा एक जगह से दूसरी जगह सिर्फ कपड़े बदल लेते हैं मगर अंदर से वही हैवान रहते हैं। इस मामले में कोई अपने से स्क्रिप्ट राइटिंग की जरूरत नहीं है। फेसबुक पोस्ट को ही यहां पर लिख देता हूं आप खुद पढ़े….

Buy Now on Amazon : Air cooler 15 % off, Click now

बेटियाँ बोल रही हैं #metoo : साभार फेसबुक

मित्रो मैं एक बहुत ज़रूरी घटना शेयर कर रही हूँ। मेरे मित्र चैतन्य नागर Chaitanya Nagar की बेटी है शाम्भवी नागर Shambhavi Nagar । वैसे इस नाम की जगह किसी की भी बेटी का नाम हो सकता था। उसने आज से पाँच साल पहले की घटना का खुलासा किया है, जब वह छठी क्लास में थी और महज बारह साल की बच्ची थी।

हममें से बहुतों को तो पता ही नहीं होता कि हमारी बच्ची इतना चुप चुप क्यों रहती है। चैतन्य नागर ऐसे पिता हैं जिन्होंने अपने बच्चों को बिना किसी भेदभाव, बिना किसी रूढ़ि, परम्परा के बड़ा किया है। और इसी परवरिश ने बेटी को वह साहस और दिलेरी दी है कि आज वह इस शोषण के खिलाफ मुखर हो पाई है और दोषी को पकड़वाने और सज़ा दिलाने के लिए एकदम दृढ़ संकल्प है।

देश की बेटी शाम्भवी ने खुद आपबीती को इंस्टाग्राम पर बताया

शाम्भवी ने अपने इंस्टाग्राम पर दोषी व्यक्ति का चित्र और नाम दिया है। और इसे वायरल करने की अपील की है जिससे इस व्यक्ति से और लोग भी सतर्क रह सकें। यह व्यक्ति समाज के लिए बहुत खतरनाक है। और जिस तरह उसने शाम्भवी का उत्पीड़न किया, बिल्कुल उसी पैटर्न पर दो अन्य छोटी बच्चियों का भी किया। उसकी नई शिकार भी बारह तेरह साल की बच्चियाँ हैं।

ये दो मामले तो शाम्भवी के सामने खुल गए, और भी न जाने कितने होंगे जो बच्चियाँ डर से कहीं कह नहीं पाई होंगी। इन दो मामलों के सामने आने पर ही शाम्भवी को लगा कि चुप रहने का मतलब है कि उस व्यक्ति को अभी और नन्हीं बच्चियों के शिकार करने देना। बीते पाँच साल में उसने कितने और ऐसे उत्पीड़न किये होंगे, और कितने अभी करता, कौन जाने!

इस छोटी सी उम्र में टीनएजर शाम्भवी की दिलेरी सब बच्चों का हौसला बढ़ाएगी, उनके माता पिता का हौसला बढ़ाएगी कि वे अपनी बेटियों के साथ किसी भी स्थिति में पूरी मजबूती से बिना शर्त खड़े हों। और हम मित्र भी ऐसे में साथ दें। और अब बुरी बातों को एक पल भी बर्दाश्त न करें।

मैं इस घटना को सामने लाने वाली बच्ची शाम्भवी नागर और उनके पिता चैतन्य नागर का नाम इसलिए भी लिख रही हूँ कि वे इस लड़ाई को खुल कर लड़ना चाहते हैं और इसलिए भी कि हम सब उनका खुल कर साथ दे सकें। अपराधी को शर्मिंदगी होनी चाहिए और कानून द्वारा नियत सजा मिलनी चाहिए। ऐसे लोगों का अपराध इसलिए भी बहुत बड़ा है कि इन जैसों के कारण भले लोग भी संदेह के घेरे में आ जाते हैं। यह मुश्किल हो जाता है कि हम अपने बच्चों के मामले में किस पर भरोसा करें और किस पर न करें। इसका अर्थ यह भी नहीं कि हर व्यक्ति पर संदेह करें, पर अपने छोटे बच्चों को किसी के हवाले करने से पहले पूरी जाँच परख ज़रूरी है।

Read Also : POCSO ACT : पीड़ित बच्चे का प्राइवेट अस्पताल भी फ्री में करेगा इलाज, मना किया तो जेल

ऐसे पिता हर बेटी-बेटे को दें जो खुद आगेे आए कहे कि लोग अवेयर हों और चुप न बैठे

शाम्भवी ने अपनी पोस्ट अंग्रेज़ी में लिखी है। उनके पिता ने वह पोस्ट मुझे भेजी है कि मैं इसे फेसबुक मित्रो से शेयर करूँ जिससे वह व्यक्ति सामाजिक रूप से भी एक्सपोज़ हो।

मैं उसकी पोस्ट के कुछ हिस्से को हिन्दी में अनुवाद कर के यहाँ लिख रही हूँ-

‘मुझे याद है मुझे हमेशा बड़ों की इज़्ज़त करना सिखाया गया। ‘बड़े हैं’ यह कहकर यह उन्हें गैर जरूरी सम्मान दिया जाता है। हमारे माता पिता ने हमें अजनबियों से कुछ भी लेने से मना किया, जिन लड़कों से हम मिलते थे, उनसे सावधान रहने को कहा, लेकिन जिस व्यक्ति ने मेरा बचपन छीन लिया वह व्यक्ति वो था जिस पर मेरे माता पिता ने मुझे पढ़ाने के लिए भरोसा किया। मैं गणित में हमेशा से कमजोर थी और मुझे अच्छा ग्रेड चाहिए था, इसके लिए वह आया था – सफेद पूरी बाँह की शर्ट, फॉर्मल पैंट, अजीब सी मुस्कान और चोरों वाली चाल ढाल।

उसने बारह साल की बच्ची का कई तरह से ब्रेन वाश करना शुरू किया। अगर आप ‘ग्रूमिंग’ शब्द समझते हों तो यह उसका क्लासिक केस है। यह आदमी पचास साल का प्रौढ़ था, मतलब ऐसा जिस पर आप उसकी उम्र के नाते भी सहज भरोसा कर लेंगे।

आगे घटना ऐसे बढ़ी कि मैं बाथरूम में उल्टियाँ कर रही थी क्योंकि उसने मेरे ऊपर इस तरह सेक्सुअल एसॉल्ट किया था कि मैं उस घटना को दोहराना भी नहीं चाहती। यह सब वह दो महीने तक करता रहा, जब तक कि किसी घटनावश उसे ट्यूशन से हटा नहीं दिया गया।

मेरी कहानी जटिल, उलझी हुई और खून में सनी हुई है। इसमें खून से दस्तखत किए हुए पत्र हैं, बाइबिल पर हाथ रखकर खाई हुई कसमें हैं और किसी को बताने पर आत्महत्या की धमकियाँ हैं। उसका नाम सुनील दुआ है जिसने अपने गन्दे स्पर्श और घिनौनी नजरों से मेरा बचपन बरबाद किया। यहाँ तक कि अब मैं किसी लड़के को नहीं चूम सकती क्योंकि मेरे सामने उसका गन्दा चेहरा आ जाता है। अब मेरे लिए चुम्बन किसी कविता की तरह सुंदर नहीं हो सकता, हो ही नहीं सकता।

इन बातों को पाँच साल बीत चुके हैं। लेकिन मैं आज भी बेहद यन्त्रणा में हूँ। मैं उन छोटी बच्चियों के प्रति जिम्मेदारी महसूस करती हूँ जो आगे इस व्यक्ति के घिनौनेपन का शिकार बन सकती हैं। अगर मेरी इस बात से किसी को लगता है कि मैं अटेंशन सीकर हूँ तो वह मुझे तुरन्त अमित्र और ब्लॉक कर दें। दोषी व्यक्ति आज भी अशोक नगर और जार्ज टाउन में क्लास ले रहा है, एल चिको जा रहा है, सामान्य जिंदगी जी रहा है , जैसे कि ज़्यादातर यौन हमलावर करते हैं।

मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि उसे सजा मिले। मैंने सालों तक अपना मुँह बन्द रखा। लेकिन अब समय आ गया है दोस्तो कि मैं अपनी बेड़ियों को तोड़ूँ और आपके सामने वह क्रोध ज़ाहिर होने दूँ जो मैंने अब तक दबा रखा था।’

साभार : Sandhya Navodita की फेसबुक पोस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *