Police : देश की सेवा के साथ मां का फर्ज निभाने वाली एक सिपाही, दूसरी एसएसपी, दोनों को सलाम

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मां आखिर मां होती है। हर फर्ज निभाती है। इसीलिए सही ही कहा जाता है कि भगवान से ऊपर मां का दर्जा होता है। वाकई, मां के सामने हर समय एक नई चुनौती आती है। जिसे वह पूरी शिद्दत के साथ करती है। लक्ष्य कैसा भी हो, मुश्किल कितनी भी हो मगर मां हमेशा उसे मुस्कुराकर पूरा कर लेती है। यहां बात कर रहे हैं पुलिस विभाग की।

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पुलिस महकमा जिसमें ड्यूटी के लिए कोई समय-सीमा नहीं है। कोई छुट्‌टी नहीं है। यही एक ऐसा विभाग है जिसमें लोग 24 घंटे और 7 दिन लगातार काम करते हैं। छुट्‌टी कभी-कभार ही मिलती है। वह भी बड़ी मुश्किल से। पद चाहे सिपाही का हो या एसपी या इससे भी बड़े अधिकारी की। सभी के साथ लगभग यही स्थिति है।

लखनऊ में तैनात स्वास्ति सिंह, घर पर अकेली हैं इसलिए ड्यूटी के समय भी मां का निभाती है धर्म

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ये हैं स्वास्ति सिंह। लखनऊ के गाजीपुर थाने में तैनात हैं। इनके घर पर अभी बच्चे को देखने के लिए कोई नहीं है। वहीं, पूरे देश में लोकसभा चुनाव को लेकर सभी सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तो किसी को छुट्‌टी भी नहीं मिल रही है। ऐसे में अक्सर लोग कोई न कोई बहाना बनाकर छुट्टी ले लेते हैं। पर देश की सच्ची सेवा करने वाले हर वक्त तत्पर रहते हैं। उन्हीं में से एक हैं ये स्वास्ति सिंह। इनकी ड्यूटी और मां दोनों के फर्ज के बीच में कोई नहीं आ सकता है।
दिन में जिस स्थान पर सुरक्षा के लिए इनकी ड्यूटी लगाई गई थी वहां ये तैनात रहती हैं और अपनी बच्चे को भी साथ रखती हैं। नींद आए तो कंधे पर सुला देती हैं और भूख लगे तो उसे बोतल से दूध पिला देती हैं। मगर इस दौरान ये कभी बैठकर नहीं बल्कि खड़े होकर ही अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी के साथ करती रहती है।

यहां आईपीएस अधिकारी को देखिए : इंदौर की एसएसपी हैं, रात में औचक निरीक्षण पर निकलीं तो साथ में मां का फर्ज भी निभा रहीं हैं


स्वास्ति सिंह यूपी पुलिस में सिपाही हैं तो ये हैं रुचि वर्धन। आईपीएस अधिकारी हैं। यह मध्य प्रदेश पुलिस में तैनात हैं। इस समय इंदौर की एसएसपी हैं। अपने शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये हमेशा अलर्ट रहती हैं। मगर एसएसपी होने के साथ वो एक मां भी हैं। ऐसे में बेटी को भी भला अपने से कैसे दूर कर सकती हैं। इसलिए वह साथ गोदी में बेटी को लेकर भी अक्सर निरीक्षण करने चली जाती हैं। ऐसे में रुचि वर्धन अब उन महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं जिन्हें लेकर अक्सर लोग कहते हैं कि परिवार और ड्यूटी दोनोंं के साथ ये ईमानदारी नहीं दिखा सकती हैं। ऐसी गलत सोच रखने वालों के लिए ये सबसे बड़ा व सटीक जवाब है।

2006 बैच की हैं आईपीएस, सबकी मदद के लिए हमेशा रहती हैं तैयार

2006 बैच की आईपीएस ऑफिसर रुचि वर्धन क्रिमिनल के लिए कड़े तेवर अपनाने से जानी जाती हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों की लापरवाही पर भी हमेशा नजर रखती हैं। मगर साथ में यह भी ध्यान रखती हैं कि आखिर किसी पुलिसकर्मी को कोई दिक्कत तो नहीं है। दरअसल, ऐसे बहुत कम अधिकारी मिलते हैं जो अपने जूनियर के सुख-दुख के बारे में भी जानकारी लेते हैं और उनकी मदद करते हैं। यही वजह है कि कई राज्यों में ऐसे पुलिसवाले भी हैं जो अपने सीनियर से परेशान होकर आत्महत्या तक कर लेते हैं।

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