अगवा बच्ची कशिश रावत 3 साल बाद भी नहीं मिली, माता-पिता ने छोड़ा घर, उम्मीद आपके सहारे

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इस बच्ची को ध्यान से देखिए। शायद आपको याद होगा। नाम है कशिश रावत (Kashish Rawat)। अपहरण के समय 5 साल की थी। अब से 3 साल पहले 12 मई 2016 की शाम को दिल्ली से सटे नोएडा (Noida) से इसका अपहरण (kidnapping) हुआ था। उस समय से लेकर आज तक इस बच्ची के बारे में कोई सुराग नहीं मिला है। इस बच्ची के माता-पिता यूपी पुलिस, गृह मंत्रालय, पीएमओ से लेकर हर उस दरवाजे तक पहुंच चुके हैं जहां से कुछ उम्मीद बन सकती थी। मगर कहीं से कोई मदद नहीं मिली।

आलम ये हुआ कि इस बच्ची के माता-पिता अपनी मेहनत की सारी कमाई इसे खोजने में खर्च कर दिए। घर का किराया भी नहीं दे पा रहे थे। अब आखिरकार मजबूर होकर नोएडा में अपने घर को छोड़कर उत्तराखंड के अपने गांव में रहने लगे हैं। इनका सबकुछ छूट गया मगर अब भी बेटी के मिलने की उम्मीद नहीं छूटी। बच्ची के पिता संजय रावत का कहना है कि पुलिस और सिस्टम से हार चुका हूं अब देश के आम लोगों से ही उम्मीद है कि इस बच्ची के बारे में कुछ बता सकते हैं। अगर आपको कहीं बच्ची दिखती है तो तुरंत मेरे नंबर 09643985012 पर बता दें।

मेरी लापता बेटी की जगह किसी मंत्री या अधिकारी की बेटी होती तो भी सिस्टम ऐसे ही काम करता : पिता

  Missing Girl Kashish Rawat mother

कुछ दिन पहले दिल्ली में आए कशिश रावत के पिता संजय रावत ने कहा कि संजय रावत ने बताया कि दो साल तक पुलिस अधिकारी से लेकर सीएम, गृह मंत्रालय, पीएमओ और तमाम जगहों पर बेटी का पता लगाने के लिए चक्कर लगाए। मगर कहीं से भी मदद नहीं मिली। अब देश के सिस्टम से हार चुका हूं। वह सवाल उठाते हैं कि क्या मेरी बेटी की जगह किसी मंत्री या अधिकारी की बेटी होती तो भी सिस्टम ऐसे ही काम करता? शायद नहीं, इसलिए अब मजबूर होकर नोएडा छोड़ने का फैसला लेना ही पड़ा। नोएडा में अच्छी नौकरी थी। उसे भी छोड़नी पड़ी क्योंकि बेटी की तलाश में होने वाले खर्च से घर चलाना भी मुश्किल हो गया था। अब उत्तराखंड स्थित अपने गांव लौट आया हूं।

12 मई 2016 की शाम हुआ था अपहरण, आज भी पुलिस कहती है ‘बच्ची की तलाश जारी है’ आखिर कब तक

12 मई 2016 की शाम में नोएडा सेक्टर-22 एच-ब्लॉक के पार्क में खेलने के दौरान कशिश अचानक लापता हो गई थी। उस समय उसकी उम्र महज 5 साल थी। आज वह 8 साल की हो गई होगी। मगर कहां है, किसी को पता नहीं। घटना वाले दिन पार्क के पास में ही जागरण का कार्यक्रम भी चल रहा था। उसी समय एक संदिग्ध व्यक्ति जो काफी समय से पार्क में आकर बैठता था वही कशिश को लेकर चला गया था।

कशिश के पिता संजय रावत व मां सरिता रावत ने रात करीब 8 बजे तक बच्ची की तलाश की थी, जब वह नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी थी। जिसके बाद पुलिस ने तुरंत रिपोर्ट दर्ज नहीं की और 24 घंटे तक उसके लौटने का इंतजार करते रहे। 13 मई 2016 को जब मामला तूल पकड़ा तब पुलिस ने पहले गुमशुदगी और फिर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। कई दिनों बाद भी बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला तब नोएडा से लेकर दिल्ली व आसपास के शहरों में मार्च निकाला गया था। आज भी इस बारे में पुलिस कहती है कि कशिश की तलाश जारी है।

उस समय यूपी व उत्तरांखड के सीएम भी आए नोएडा, मगर फिर सभी भूल गए

2016 में कई महीने तक बच्ची को तलाशने के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया गया था। यह भी कहा गया था कि सुराग देने वाले को 5 लाख रुपये तक इनाम दिया जाएगा। उस समय यूपी और उत्तराखंड तक के सीएम ने मामले में हस्तक्षेप कर कशिश को तलाशने के लिए निर्देश दिए थे। इसके बाद भी नतीजा यह है कि तीन साल बाद भी बच्ची का सुराग नहीं मिला। अब इस मामले की जांच नोएडा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट कर रहा है। मगर अब चाहे अधिकारी हो या मंत्री या नेेता, सभी कशिश को भूल चुके हैं।

एक संदिग्ध का स्केच बना, एयरपोर्ट पर भी बच्ची के साथ संदिग्ध महिला दिखी, पर सुराग नहीं मिला

कशिश रावत का मामला 2016 में मीडिया व सोशल मीडिया में काफी सुर्खियों में रहा था। दिल्ली-एनसीआर के सभी ऑटो पर बच्ची की फोटो लगाकर उसकी तलाश की गई थी। पुलिस ने भी कई शहरों में तलाश अभियान चलाया था। उस दौरान पता चला था कि बच्ची को नोएडा में आखिरी बार एक ऑटो वाले के साथ नोएडा के सेक्टर-18 के पास देखा गया था। उस ऑटो वाले का स्केच भी बनाया गया था। इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर बच्ची को एक महिला के साथ सीसीटीवी में देखा गया था फिर भी कोई सुराग नहीं मिल पाया था। मगर बच्ची के परिजनों ने हार नहीं मानी और तलाश के लिए कई राज्यों की पुलिस से मदद मांगते रहे लेकिन कहीं से कोई सुराग नहीं मिला।

Crime Helpline की अपील 

  • अगर कहीं भी आप बच्ची को देखें तो इस बारे में तुरंत कशिश रावत के पिता संजय रावत को सूचना दें।
  • संजय रावत का मोबाइल नंबर है 09643985012। या फिर आप क्राइम हेल्पलाइन के वॉट्सएप नंबर 9582415452 पर भी बता सकते हैं।
  • इस बच्ची को अगवा करने वाला गैंग खासतौर पर लड़कियों का अपहरण करने में सक्रिय है। ये बच्ची राजस्थान (Rajsthan) दिल्ली (Delhi), कोलकाता या असम के आसपास हो सकती है।
  • क्राइम हेल्पलाइन की पहल पर अब तक कई बच्चियों और अपहरण हुए बच्चे को तलाशा जा सका है, आपकी एक पहल इस बच्ची को भी उसकी मां से मिलवा सकता है।

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