मिसिंग बच्चों की तलाश में इस नंबर 9310597739 का राज कर देगा हैरान, ये खुद ही बना शिकार

आजकल मिसिंग (Missing) बच्चों के मैसेज पढ़ते ही अक्सर सोशल मीडिया पर उसे फारवर्ड कर देते हैं। दरअसल, हम उस बच्चे की तलाश में मदद करना चाहते हैं, ऐसा सोचकर यह कदम उठाते हैं। मगर इसके पीछे कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी को परेशान करने का जरिया बना चुके हैं या फिर फर्जी मैसेज बनाकर उस बच्चे को अपने पास लेकर उसकी तस्करी (ट्रैफिकिंग) भी करने की तैयारी में हो जाते हैं। लिहाजा, किसी भी मैसेज को आगे बढ़ाने से पहले उसकी जांच करना भी जरूरी है। ऐसा करने से ही सही मायनों में आप उसकी मदद कर सकते हैं।

अभी हाल में ही पिछले एक महीने से 3-4 साल के बच्चों से लेकर किशोरी व युवकों के लापता होने में भी एक नंबर 9310597739 का ही प्रयोग किया गया है। इसी मोबाइल नंबर को देकर यह बताया गया है कि यह मेरी बेटी है और इसकी तलाश में मदद करें। अभी 25 मई को बिहार के पश्चिम चंपारण के बेतिया से लापता हुई 15 साल की किशोरी के मामले में भी इसे दिल्ली से लापता हुआ बताकर 9310597739 यही नंबर जारी कर दिया गया।

इसमें लिखा गया कि ये मेरी बेटी है और आप इसकी तलाश में मदद करें। इस नंबर पर संपर्क करें। जबकि असलियत में लापता हुई बच्ची बिहार की है और 30 मई को ही घरवालों को मिल गई थी। अब इस नंबर 9310597739 वाले के बारे में जांच में पता चला कि इसका असली मालिक मेडिकल फार्मा कंपनी में काम करने वाले कनक कांत मिश्रा हैं और एक महीने से वह खुद ही परेशान हैं कि कौन उनके नंबर को डाल रहा है। उस नंबर पर इतने फोन आ रहे हैं कि वह उसका प्रयोग ही नहीं कर रहे हैं।

बच्ची के परिवार ने कहा, इस नंबर को हम नहीं जानते हैं

इस किशोरी स्मृति के बारे में उसके पिता राजीव ने बताया कि उनकी बेटी मिल गई है। मगर सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि दिल्ली में रहने वाला कोई व्यक्ति उसे अपनी बेटी बताकर अपने मोबाइल नंबर 9310597739 पर मदद मांग रहा है। यह पूरी तरह से गलत है। इस नंबर वाले व्यक्ति को हम बिल्कुल भी नहीं जानते हैं। अगर जल्द ही इस नंबर को बंद नहीं कराया गया और मिसयूज नहीं रोका गया तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।

9310597739 इस नंबर वाला व्यक्ति गलत नहीं, इसे भी साजिश कर फंसाया जा रहा है

इस नंबर को लेकर दिल्ली के विधायक कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया है कि ये मोबाइल नंबर एक नहीं बल्कि कई बच्चों के मिसिंग होने के बाद प्रयोग में लाया गया है। इससे ऐसा लग रहा है कि कोई ट्रैफिकिंग करने वाला नेटवर्क काम सक्रिय है। वाकई, जब एक ही नंबर से कई बच्चों के मामले में शामिल कर लिया जाए तो ऐसा लगना स्वाभाविक है। मगर जब इसकी पड़ताल की गई तब यह पता चला कि ये नंबर एक फार्मा कंपनी के सेल्समैन कनक कांत मिश्रा का है। उन्होंने अपना नंबर ऑनलाइन भी दवाइयों की सप्लाई के लिए दिया हुआ है। कनक कांत मिश्रा ने बताया कि पिछले एक महीने से वह परेशान हैं।

एक महीने से लगातार हर सेकेंड आते हैं फोन, अब दूसरा फोन खरीद कर रहा हूं यूज

इस नंबर को चलाने वाले कनक कांत मिश्रा ने बताया कि एक महीने पहले उसके पहचान के व्यक्ति की बच्ची लापता हुई थी। तब उसके मैसेज को फारवर्ड कर दिया था। उसी के बाद से अलग-अलग बच्चियों के मामले में उसी के नंबर को यूज किया जा रहा है। जिसकी वजह से हर सेकेंड मेरे फोन पर किसी न किसी की कॉल आती है। इससे वह मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। इस वजह से दूसरा फोन खरीदकर प्रयोग कर रहा हूं।

लोगों को खुद पड़ताल कर मिसिंग बच्चों के मैसेज फारवर्ड करने की जरूरत 

कनक कांत मिश्रा ने बताया कि लोग मिसिंग बच्चों के मैसेज को बिना पड़ताल किए फारवर्ड कर देते हैं। अगर कोई भी व्यक्ति उसे आगे भेजने से पहले एक बार फोन कर पूछ लेता तो मेरा नंबर वायरल नहीं होता। मगर किसी ने भी ऐसा करने की कोशिश नहीं की और आज चाइल्ड ट्रैफिकिंग से भी मेरे नंबर को जोड़ दिया गया। इससे वह खुद परेशान हैं और अब जल्द ही पुलिस में शिकायत करेंगे।

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