इंश्योरेंस पॉलिसी बोनस के नाम पर ठगने वालों से पूछें ये 3 सवाल तो खुल जाएगी पोल

क्या आपके पास भी इंश्योरेंस पॉलिसी में नए फायदे या बोनस दिलाने के लिए कभी फोन आया है। अगर आपके पास कोई इंश्योरेंस पॉलिसी है तो आपका नाम, जन्मदिन और घर का पता बताते हुए कोई भी फोन पर आपका भरोसा जीत सकता है। किसी फोन करने वाले को आपकी इतनी पर्सनल डिटेल का पता हो तो जाहिर है कि भरोसा हो ही जाएगा। बस, फिर यही से हो जाती है ठगी की शुरुआत।

इंश्योरेंस कंपनी वाले ही कुछ लोग आपकी डिटेल बेच रहे

अगर आपके पास भी ऐसी कॉल आए तो तुरंत सावधान हो जाइए। दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में काफी संख्या में ऐसे कॉल सेंटर चलाए जा रहे हैं जो आपकी डिटेल के साथ फोन करके आपसे पैसे हड़प लेते हैं। नोएडा में पिछले दिनों पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों ने पुलिस को बताया है कि अभी भी काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो छोटे-छोटे कमरे में भी कॉल सेंटर खोलकर लोगों से जालसाजी कर रहे हैं। इन कॉल सेंटर्स को आपकी इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी या अन्य किसी तरीके से डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है जिसकी बदौलत वो जालसाजी कर रहे हैं।

जालसाजी के ये हैं 2 खास तरीके
1 – बोनस के लिए 70 हजार या लाखों रुपये मिलने का देते हैं लालच, जानिए फोन पर क्या कहते हैं : लाइव स्क्रिप्ट
कॉल सेंटरकर्मियों के पास पहले से इंश्योरेंस कराने वाले कस्टमर की डिटेल होती है। इसलिए कस्टमर को आसानी से भरोसा भी हो जाता है। ऐसे में कॉल सेंटरकर्मी कहते हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसी के 5 साल से ज्यादा समय होने की वजह से आपको 70 हजार या इससे ज्यादा रुपए का बोनस मिलेगा। अगर आप इसे जल्दी क्लेम नहीं करेंगे तो आपका इंश्योरेंस एजेंट इसे क्लेम कर लेगा। हालांकि, इस बोनस के लिए भारत सरकार के नियमानुसार आपको सरकारी एकाउंट में 39099 रुपए जमा कराने होंगे। इसके एवज में आरबीआई की तरफ से जारी किए सर्टिफिकेट को दिखाकर आप बोनस को क्लेम कर सकेंगे।
2- एलआईसी लोकपाल के नाम का भी झांसा
बोनस के अलावा एलआईसी लोकपाल के नाम पर भी जालसाजी की जा रही है। दरअसल, इंश्योरेंस कराने के बाद लोग प्रीमियम भरते हैं परंतु इस बारे में कोई कंपनी से नए ऑफर के बारे में बात नहीं करता है। यह आम बात है। इसी का फायदा उठाते हुए कॉल सेंटरकर्मी फोन पर कहते हैं कि आपने 5 या 10 साल से अपने एजेंट से संपर्क नहीं किया है।

ऐसे में आपको पॉलिसी के कई फायदों के बारे में जानकारी नहीं मिली पाई है। अगर आप अभी 20 से 25 हजार रुपए जमा करेंगे तो 6 महीने बाद ही आपको बोनस के साथ 1.5 लाख रुपए अतिरिक्त मिलेंगे। इस तरह लोग इनके झांसे में फंस जाते हैं।

जालसाज दिल्ली-एनसीआर के मोबाइल नंबर से करते हैं कॉल
यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में यह भी पता चला है कि इंश्योरेंस बोनस के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों का दिल्ली-एनसीआर में ही नेटवर्क है। यहां पर किराए के कमरों में फोन लगाकर ऑपरेट कर रहे हैं। सभी कॉल दिल्ली-एनसीआर रीजन के मोबाइल नंबर से ही करते हैं। हालांकि, इसके बाद भी जालसाज कई बार खुद को मुंबई से कॉल करने की बात करते हैं।
महज 2-3 महीने में बदल लेते हैं ठिकाना
साइबर क्राइम एक्सपर्ट व आईपीएस डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि जितने भी कॉल सेंटर चलाए जा रहे हैं वो औसतन 2-3 महीने में ही अपना ऑफिस बदल लेते हैं। इस तरह किसी को शक नहीं हो पाता है। इसके अलावा कुछ गिने-चुने कर्मचारियों को छोड़कर हमेशा ये नए कर्मचारियों को ही काम पर लगाते हैं ताकि पकड़े जाने का डर न हो।
इंश्योरेंस के डेटा में जितनी डिटेल, कीमत उतनी ज्यादा
एसटीएफ की जांच में पता चला है कि डेटा आसानी से लीक कर बेचे जा रहे हैं। जिस इंश्योरेंस कंपनी के डेटा को बेचा जाता है, उसकी कीमत दी जाने वाली डिटेल पर निर्भर होती है। अगर डेटा में सिर्फ नाम, मोबाइल नंबर व पता होता है तो उसकी कीमत काफी कम होती है। वहीं, अगर डेटा में पॉलिसी नंबर, लेटेस्ट प्रीमियम जमा करने की डेट, पैन नंबर व अन्य इस तरह की बड़ी डिटेल होती है जिससे ग्राहक को झांसे में लेने आसानी होती है, तो उसकी कीमत लाखों में पहुंच जाती है।

ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए सिर्फ 3 सवाल पूछे खुल जाएगी पोल

1- जैसे ही आपको बोनस या अन्य कोई लालच देने वाला फोन आए तो तुरंत चौकन्ना हो जाएं क्योंकि आप खुद सोचें कि कोई भी आपको ज्यादा फायदा क्यों कराएगा। इसलिए तुरंत उससे इंश्योरेंस कंपनी के ब्रांच का नाम व कोड के साथ पूरा पता पूछें

2- उससे अपनी लास्ट या रैंडम किसी महीने की प्रीमियम जमा करने की डेट पूछें और साथ ही उससे कहें कि अपनी ऑफिशियल ईमेल से मुझे मेल करें फिर उसकी असलियत उजागर हो जाएगी

3- जैसे ही आप उसे सभी जानकारी ईमेल से या फिर पोस्ट करने को कहेंगे तो वो बात बदलने लगेगा और खुल जाएगी पोल

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