घर पर बच्चों को सुरक्षित रखना है तो ये टिप्स जरूर आजमाएं 

Special Desk : child safety

वाकई बच्चे आंखों के तारे होते हैं। इन्हें जरा सी भी चोट लग जाए तो खुद को हम कोसने लगते हैं। खुद पर गुस्सा भी निकालते हैं। लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान रखिए कि जब कभी बच्चे को किसी भी तरह से चोट लगती है तो वो सिर्फ और सिर्फ हमारी लापरवाही होती है। खासतौर पर लापरवाही तब जब सेफ नहीं रखने के बाद भी हम ये सोच लेते हैं कि अरे बस कुछ देर के लिए ही तो बच्चे को अकेला छोड़ रहे हैं। या फिर सोच लेते हैं कि थोड़ी देर बाद ही तो आ जाएंगे। मगर सच यही है कि आपकी कुछ सेकेंड की चूक आपके मासूम को परेशानी में डाल देती है।

नवजात के 2 महीने का होते ही सतर्क होने की जरूरत

आपके घर आया नवजात दो से ढाई महीने का होने तक तो ज्यादा किसी को परेशान नहीं करता है। उसके बाद बच्चे तेजी से हाथ-पैर चलाने लगते हैं और फिर पैर से ताकत लगा धक्का देते हुए सिर की तरफ पीछे हटने लगते हैं। इसलिए ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चा जहां लेटा है उसके पीछे खाली जगह तो नहीं है। इसके अलावा बच्चे पलटने की कोशिश में भी जुट जाते हैं। ऐसे में कभी भी चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। लिहाजा, यही वो समय है जब आपको पूरी तरह से अलर्ट रहकर बच्चे की देखरेख करनी पड़ती है।

बच्चे जब बड़े होने लगे तो बालकनी और घर के खुले हिस्से को जरूर चेक करें

  • सबसे पहले जरूरी है कि आप जांच करें कि आपके घर की बालकनी कैसी है। बालकनी में लगी रेलिंग की हाइट इतनी ऊंची होनी चाहिए जिससे क्राउल कर रहे बच्चे के गिरने की संभावना ही खत्म हो जाए।
  • बालकनी में यह भी जरूर देखें कि रेलिंग की डिजाइन में गैप कितना है। क्या इस गैप में किसी भी तरह का बच्चा बाहर निकल तो नहीं जाएगा। अगर ऐसा है तो जाली जरूर लगवाएं।
  • बच्चा किसी भी तरह से दरवाजों के कोने मेंं न छुप सके। ऐसा होने पर अचानक दरवाजा खोलने पर चोट लग सकती है।
  • बच्चे को कभी भी किसी तरह से बेड के किनारे नहीं सोने दें। अगर बच्चे को गिर जाने की जरा भी शंका हो तो अकेला भी नहीं छोड़िए। भले ही आपको कुछ सेकेंड के लिए जाने की जरूरत क्यों न पड़ जाए।
  • घर में नीचे फर्श पर हमेशा सफाई रखें ताकी बच्चा उसे जीभ से चाटे तो भी कोई हेल्थ को नुकसान न हो सके।
  • घर की दीवारों पर नीचे की तरफ लगे बिजली के तार या फिर सॉकेट को ध्यान से बच्चे के क्राउल करने से पहले ही ठीक कर लें या उसे बंद कर दें।

बाथरूम और दवाओं को लेकर बच्चे के साथ रहें खास अलर्ट

  • घर में बाथरूम के दरवाजे को हमेशा लॉक करके रखें। बच्चे सबसे ज्यादा क्राउल करते हुए बाथरूम की तरफ जाना ज्यादा पसंद करते हैं।
  • बाथरूम में या घर में कहीं भी किसी भी स्थिति में कोई लिक्विड से भरी बोतल या कांच नहीं रखें। क्योंकि बच्चा अक्सर किसी भी सामान को जीभ से टच करके ही अहसास करता है। ऐसे में घर में रखा कोई केमिकल पदार्थ जानलेवा हो सकती है।
  • बाथरूम में या घर में चेक करें कि कहीं भी गर्म पानी तो नहीं है। अगर कहीं भी ऐसा गर्म पानी रखा है तो वहां बच्चे को आने ही नहीं दें।
  • किसी भी उम्र के बच्चे को किसी भी हालत में अपने मन से कोई भी दवा नहीं दे। दरअसल, बच्चों की खराब तबीयत होने पर जल्दबाजी में या घबराकर घर में रखी दवा को पहले देते हैं। पर ऐसा बिल्कुल भी न करें।
  • अच्छे पीडियाट्रिक डॉक्टर को अपना फैमिली डॉक्टर जरूर बनाएं। ऐसा करने से कभी इमरजेंसी में बच्चे की तबीयत खराब होने पर फोन पर ही दवा पूछकर तुरंत दे सकते हैं। हालांकि, कोशिश करें कि डॉक्टर को हमेशा दिखाने के बाद ही कोई दवा दें।
  • घर में रखी किसी भी तरह की दवा को हमेशा किसी डिब्बे या अन्य पैकेट में लॉक करके ही रखें। दरअसल, बच्चों को दवाएं काफी आकर्षित करती हैं जिस वजह से वो उसे खा लेते हैं।
  • घर में फर्श पर या किचन के आसपास कोई प्लास्टिक की थैली या पॉलिथीन को नहीं छोड़ें। ऐसा करने पर बच्चे उसे कई बार मुंह में डाल देते हैं जो सांस नली में जाकर सांस भी रोक सकती है।
  • घर में फूटे हुए या पुराने बलून को कभी नहीं रखें। बलून के साथ बच्चा जब खेल रहा हो तो खुद मौजूद रहें और जब बच्चा खेल ले तो बलून को दूर कर दें। क्योंकि बलून को भी बच्चा आसानी से मुंह में डाल लेता है।

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