घरेलू हिंसा की आप भी हैं शिकार, यकीन न हों तो ऐसे समझें कानून को..

Crime HelpDesk : New Delhi

क्राइम रिकॉर्ड बताता है कि देश में अभी भी 70 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। ऐसे में हर 10 से में 7वीं महिला किसी न किसी रूप में चारदीवारी के भीतर प्रताड़ना झेल रही है। कहीं आप भी तो नहीं इसी दायरे में आती हैं। घरेलू महिला हिंसा कानून के तहत अगर आप लिव-इन में रहती हैं तो भी आप अपने पार्टनर के खिलाफ शिकायत कर सकती हैं। घरेलू महिला हिंसा अधिनियम-2005 को ऐसे समझिए…

सवाल : क्या सिर्फ मारपीट करना ही इस एक्ट में शामिल है या फिर मानिसक प्रताड़ना भी?

जवाब : घरेलू हिंसा में महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना करना इसमें शामिल है। महिला के साथ मारपीट की गई हो या फिर मानसिक तौर पर उसे प्रताड़ित किया गया हो, दोनों ही घरेलू हिंसा के तहत अपराध है। मानसिक हिंसा के तहत महिला को गाली-गलौज देना, उसे ताने मारते रहना, बच्चे या खाना बनाने को लेकर भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचाना भी इसमें शामिल है। पैसे मांगने पर नहीं देना या पैसे छीन लेना भी इसी के तहत आता है।

सवाल : कई बार घरेलू हिंसा की शिकायत सबसे पहले पत्नी को घर से निकाल देता है ऐसे में इस डर से शिकायत नहीं कर पाते, तो क्या करें?
जवाब : यह बात सही है कि घरेलू हिंसा के अधिकतर मामले में शिकायत करने या ऐसा महसूस होने पर ही पति या उसके घर वाले विवाहिता को घर से निकाल देते हैं। ऐसे में समाज में बदनामी के डर से महिलाएं शिकायक करने में कतराती हैं। मगर कानून बनाते समय पहले ही यह सोच लिया गया था कि ऐसा होगा। इसलिए कानून में यह प्रावधान रखा गया है कि विवाद के दौरान भी पत्नी को उसी घर में रहने का पूरा अधिकार है। किसी भी तरह से पति या अन्य कोई विवाहिता को घर से नहीं निकाल सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ पुलिस तुरंत एक्शन लेगी।


सवाल
: मान लिया कि नियम के तहत घरेलू हिंसा की शिकायत करने के बाद भी उसी घर में तो क्या फिर जान का खतरा नहीं बढ़ जाएगा?
जवाब : बिल्कुल। जान को खतरा हो सकता है। इसीलिए इसे भी ध्यान में रखते हुए कानून में यह है कि अगर विवाहिता उस घर में नहीं रहना चाहती और कोर्ट से सुरक्षित स्थान की मांग करती है, तो कोर्ट पति को महिला के लिए अलग जगह पर रहनेे का आदेश दे सकती है। इस तरह आप सुरक्षित रहेंगी।

सवाल : क्या घरेलू हिंसा के तहत लिव-इन पार्टनरशिप में रहने वाली लड़की भी शिकायत कर सकती है?
जवाब : हां, शिकायत कर सकती हैं। इस कानून के तहत न सिर्फ शादीशुदा महिलाएं बल्कि लिव-इन-पार्टनर में रहने वाली अविवाहित लड़की भी शिकायत दर्ज करा सकती है। वह अपने पार्टनर के खिलाफ मारपीट करने, भावनाओं को ठेस पहुंचाने की भी शिकायत कर सकती है।

सवाल : मैं नौकरी करना चाहती हूं मगर परिवार व पति मना कर रहे हैं तो क्या इसकी शिकायत कर सकती हूं?
जवाब : हां, बिल्कुल। दरअसल, घरेलू हिंसा में केवल शारीरिक या मानसिक शोषण ही नहीं आता बल्कि किसी को नौकरी करने से रोकना भी शामिल है। यही नहीं, अगर आप नौकरी नहीं करना चाहती हैं और दबाव डालकर आपसे नौकरी या कोई काम कराया जा रहा है तो यह भी घरेलू हिंसा के तहत ही आता है। इसके लिए आप घरेलू हिंसा कानून के तहत शिकायत दर्ज करा सकती हैं।


सवाल
: शिकायत करने पर क्या कोर्ट की तरह इसकी प्रक्रिया भी लंबी होती हैै? इसमें दोषी को कितनी सजा का प्रावधान है।
जवाब : नहीं, इसमेें कानूनी प्रक्रिया ज्यादा लंबी नहीं है। घरेलू हिंसा के मामलों में 60 दिनों के भीतर ही फैसला देने का प्रावधान है, जिससे जल्द से जल्द न्याय मिल सके। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 1 साल की सजा और 20 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

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