इस मां का 3 साल की प्यारी बेटी को छोड़ आत्महत्या करना कितना सही?

मां आखिर मां होती है। हर वक्त, हर मुसीबत में भी अपने बच्चे का साथ नहीं छोड़ती है। मगर इस महिला के सामने आखिर क्या मजबूरी होगी कि इसने मासूम बेटी के सामने भी मौत का रास्ता चुन लिया। क्या यह सही है… नहीं, बिल्कुल नहीं। इसलिए मुश्किल वक़्त में कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखें जिससे आप आसानी से मौत को भी मात दे सकें। जरूर पढ़िए…

Crime Helpline : Noida News

नोएडा में रहने वाली इस मां ने अपनी 3 साल की बेटी को छोड़कर एक मेट्रो के सामने ट्रैक पर कूदकर जान दे दी। बताया गया कि वह अपने पति से हुई अनबन से परेशान थी। पति एक साल से बेरोजगार था। इससे आपस में कहासुनी होती रहती थी। इस वजह से 22 मार्च की सुबह यह कदम उठाया। मृत महिला खुद जस्ट डायल जैसी कंपनी में कार्यरत थी। अच्छी सैलरी थी। फिर भी जान देने से आखिर क्या मिल गया होगा। वह चाहती तो बीच का रास्ता निकाल सकती थी। अब जब जान दे चुकी जरा सोचिए उस 3 साल की मासूम का क्या होगा, किसके सहारे वो अपनी जिंदगी गुजारेगी… काश, इस बात को सोचा लिया होता या किसी से जिक्र कर लिया होता..

करीब 30 मिनट तक उलझन में रही फिर मेट्रो के सामने कूद गई

शीतल श्रीवास्तव (फाइल फोटो)

नोएडा पुलिस ने बताया कि मृत महिला की पहचान शीतल श्रीवास्तव (28) के रूप में हुई। उनकी शादी करीब 9 साल पहले 10 फरवरी 2010 को देवेश श्रीवास्तव के साथ हुई थी। दोनों की 3 साल की बेटी भी है। शीतल जस्ट डायल कंपनी में कार्यरत थीं। पिछले काफी समय से वह अपने पति से हो रही अनबन से परेशान थी। बताया जा रहा है कि रोजाना की तरह होली के अगले दिन यानी 22 मार्च की सुबह करीब 9:30 बजे वह घर से ऑफिस के लिए निकली थीं।

सुबह करीब 10:10 बजे वह दिल्ली से सेक्टर-62 की तरफ जाने वाले मेट्रो प्लैटफॉर्म पर पहुंच गई। यहां वह पहले कुछ देर टहलीं और फिर बेंच पर बैठ गईं। करीब 30 मिनट तक वह उलझन में रहीं और फिर अचानक 10:40 बजे बेंच से उठ गईं। द्वारका से आई मेट्रो के पहले कोच के सामने पहुंची फिर जैसे ही ट्रेन स्टार्ट हुई तभी ट्रैक पर कूद गई जिससे कटकर वहीं मौत हो गई।

मुसीबत में हों तो करीबी दोस्तों को जरूर एक बार हर बात शेयर करें

शीतल श्रीवास्तव जैसी आज भी काफी महिलाएं हैं जो किसी बड़ी मुसीबत में हैं। कई बार वो भी परेशान होकर आत्महत्या करने की भी ठान लेती हैं। पर बच्चों को देखकर किसी से मन की बात करके बीच का रास्ता निकाल लेती हैं। दरअसल, यह सत्य है कि आत्महत्या कर लेने से सिर्फ और सिर्फ परेशानी बढ़ती है। ऐसी स्थिति आने पर ये तीन कदम जरूर उठाएं।

आखिर क्यां करें…

  • जब कभी आप परेशान होते हैं या डिप्रेशन में आते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि आप अपने सबसे करीबी दोस्त से जरूर बात करें।
  • अपने दोस्त को ये बताएं कि निजी जिंदगी में भले कितनी भी मुसीबत में हो आने वाले समय में सबसे खुशी भी मिलेगी।
  • आमतौर पर हम मनोचिकित्सक को नहीं दिखाते हैं। ये सबसे बड़ी गलत बात है। अगर आप मानसिक परेशानी के दौरान किसी अच्छे मनोचिकित्सक को दिखाते हैं तो निश्चित रूप से आप आत्महत्या को टालकर एक नई जिंदगी को शुरू कर सकते हैं।

3 thoughts on “इस मां का 3 साल की प्यारी बेटी को छोड़ आत्महत्या करना कितना सही?

  • March 23, 2019 at 2:16 pm
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    इस दुखदाई खबर को पढ़ा, बहुत अफसोस हुआ जितनी मर्जी मुश्किल हो परंतु हमें आत्महत्या नहीं करनी चाहिए खासकर जब 3 साल के मासूम की जिम्मेदारी हम पर हो.हालांकि हम लोग नहीं समझ सकते वह किस पीड़ा से गुजर रही थी परंतु ..
    आपने सही लिखा है.

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  • March 23, 2019 at 2:18 pm
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    यथार्थ में जीने वाला और अपनी क्षमताओं का स्वयं मूल्यांकन करने वाला व्यक्ति कभी भी द्वंद में नहीं जीता। नास्तिक व्यक्ति हर हाल में खुश रहता है। मनोचिकित्सक के मतानुसार।

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  • March 23, 2019 at 3:21 pm
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    bahut dukh huaa news padhkar. aatamhatya bilkul nahi karni chahiye chahe kitni bhi muskil aa jaye life mein. yesa karne se kuch hasil nahi hota.

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