Aarushi Hemraj Murder Mystery Part-2

17 मई 2008: डबल मर्डर मिस्ट्री की शुरुआत

रोजाना सुबह 6 बजे उठता था, मगर आज 5 बजे ही जग गया। उस समय मैं नोएडा सेक्टर-20 के डी-ब्लॉक में रहता था। उठते ही सबसे पहले नवभारत टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक जागरण, अमर उजाला अखबार देखने लगा। सभी अखबारों में लगभग समान एंगल ही था। हत्या करके नौकर फरार। नेपाल भेजी गई पुलिस टीम। इस तरह की खबरें। इतना देखने के बाद तुरंत फ्रेश हुआ और बाइक स्टार्ट करके सबसे पहले सेक्टर-25 जलवायु विहार पहुंचा। मेरे कमरे से महज कुछ मिनट की दूरी पर ही था घटनास्थल। वहां देखा तो पहले से कुछ चैनल वाले खड़े थे। एक पुलिसकर्मी भी तैनात था। वह अब भी तलवार के फ्लैट के आसपास जाने नहीं दे रहा था। इसे देख मैं तुरंत सेक्टर-20 थाना पहुंचा। यहां मैंने दर्ज की गई एफआईआर की कॉपी देखी। यह देखना बहुत जरूरी था, क्योंकि उसमें क्या लिखा है, उससे केस के बारे में काफी कुछ पता चलता है।

एफआईआर में लिखा गया था.. सेवा में थाना ईन्चार्ज सेक्टर-20 नोएडा महोदय, मैं डॉ. राजेश तलवार अपने मकान में (L-32/25) नोएडा सेकंड स्टोरी जलवायू विहार में अपनी पत्नी बेटी आरूशी के साथ रहता हू्ं एक कमरे में मेरा servant हेमराज जो नेपाल का रहने वाला था रहता था। बिती रात मेरी बेटी आरूशी 14 YEARS अपने रूम में सोई हुई थी सुबह जब देखा तो मेरी बेटी बिस्तर पर मृत अवस्था में मिली उसके गले पर किसी DHAR DHAR हथियार के निशान है नोकर भी रात से ही गायब हो गया है नोकर ने मेरी बेटी की हत्या की है। Report लिखकर कानूनी कार्यवाई करने का कष्ट करें।

इस एफआईआर को पढ़ने के बाद भी कोई खास जानकारी नहीं मिली। मतलब, कोई नया एंगल नहीं मिला। हां, इतना जरूर पता चला कि नेपाली नौकर हेमराज के कई रिश्तेदार पुलिस के पास हैं, जिनसे पूछताछ कर उसकी तलाश की जा रही है। एक बात और पता चली कि तलवार के क्लिनिक में काम करने वाले एक नेपाली कंपाउंडर कृष्णा से भी पुलिस हेमराज के बारे में पता लगा रही है। उसने भी कई अहम जानकारी पुलिस को दी हैं।

इस तरह करीब 9:30 बज चुके थे। इसके बाद मैं फिर जलवायु विहार पहुंचता हूं। वहां पर पहले से 3-4 पत्रकार साथी थे। सब यही पता कर रहे थे कि आखिर हेमराज का क्या हुआ। उसके बारे में कुछ पता चला या नहीं। साथ ही, हम लोग आरुषि की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला, इस बारे में भी बात कर रहे थे। तभी थोड़ी देर बाद नोएडा पुलिस के कुछ लोग तलवार के घर के आसपास के लोगों से पूछताछ करने में जुटे थे। उसी समय नोएडा पुलिस से रिटायर्ड डीएसपी के. के. गौतम कुछ लोगों के साथ जलवायु विहार पहुंचते हैं। पता चला कि के. के. गौतम के साथ नोएडा स्थित आईकेयर हॉस्पिटल के डॉक्टर सुशील चौधरी भी थे। वहां तैनात पुलिसकर्मी ने रिटायर्ड पुलिस अधिकारी को रोकने की कोशिश नहीं की, बल्कि उन्हें सैल्यूट किया और अंदर भी जाने दिया। काफी देर तक के. के. गौतम घर में रहते हैं। वहां लोगों से बातचीत करते हैं। कुछ देर बाद अचानक के. के. गौतम घर से बाहर आते हैं। यह देखकर मैं और अन्य कुछ मीडियाकर्मी दोस्त उनसे बातचीत करने की कोशिश करते हैं, मगर वह बात नहीं करते हैं। इसके बजाय वह आसपास के मकानों और सीढ़ी की ओर देखने लगते हैं। इसके बाद टॉप फ्लोर की तरफ बढ़ने लगते हैं। सीढ़ियों पर कुछ खास नहीं, लेकिन वह रेलिंग को बार-बार काफी गंभीरता से देखते हैं। उन्हें कुछ शक होता है, तब वह कुछ सीढ़ी और आगे बढ़ते हैं। मैं भी रेलिंग को ध्यान से देखता हूं तो कुछ लाल दिखाई देता है। इसके बाद के. के. गौतम ने छत पर ताला लगा देखा तो आसपास में रहने वाले लोगों और डॉ. राजेश तलवार के भाई डॉ. दिनेश तलवार से उसकी चाबी के बारे में पूछा। जवाब मिलता है कि कल से ही उसकी चाबी नहीं मिल रही है।

के. के. गौतम कहते हैं, मुझे ऐसा लग रहा है कि कातिल ने हथियार छुपाने के लिए छत का इस्तेमाल किया है, इसलिए अब ताला तोड़ना जरूरी है। उन्होंने वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी से इस बारे में बात की। उसने कहा कि एसओ साहब आ जाएं तो बेहतर होगा। इसके बाद रिटायर्ड डीएसपी अपने मोबाइल फोन से एसएसपी ऑफिस में फोन करके इस बारे में जानकारी देते हैं। एसपी सिटी से भी इस संबंध में बात होती है। केस से संबंधित कोई मामला छत पर हो सकता है, इसका पता चलते ही सेक्टर-20 थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी दाताराम नौनेरिया, जलवायु विहार के चौकी इंचार्ज बच्चू सिंह समेत कई पुलिसकर्मी वहां पहुंचते हैं। शुरू में दाताराम नौनेरिया ताला तोड़ने के बारे में सोचते रहे। इस पर के. के. गौतम ने कहा कि इसमें सोचने वाली कोई बात नहीं है। यह तो जांच का हिस्सा है, इसलिए ताले को तोड़ दिया जाए। वहां मौजूद एक सिपाही और गार्ड ने मिलकर ताला तोड़ दिया।

इसके बाद दरवाजा खोलकर जैसे ही छत पर पहुंचे तो सामने ही खून फैला हुआ था, जो अब सूखने लगा था। छत पर जाकर देखा तो दीवार के किनारे एक शव पड़ा था। टी-शर्ट पहने हुए करीब 45 साल का व्यक्ति। सिर पर गहरा घाव। गला कटा हुआ। छत पर कुछ जगह खून सूख चुका था, मगर अब भी शरीर से थोड़ा-थोड़ा खून रिस रहा था। बाल बिखरे हुए। हाथ में घड़ी पहनी हुई थी। एक पैर में चप्पल थी। उससे अब हल्की-हल्की बदबू आने लगी थी। कूलर का ढक्कन उसके शरीर पर पड़ा था। थोड़ी दूर पर ही दूसरी चप्पल पड़ी हुई थी। कूलर का पानी लाल था। छत पर ही एक साइड पर बेडशीट डाली गई थी। जगह-जगह खून के निशान थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे वहां पर कुछ देर तक हाथापाई हुई हो, जिसके बाद उस पर हमला किया गया था। यह भी पता चला था कि जहां लाश थी, वहां पर उसकी हत्या नहीं की गई थी, बल्कि कूलर के पास की गई थी। इसके बाद उसके शव को घसीटकर दीवार के पास लाया गया था। ऐसा इसलिए कि जहां हत्या की गई थी, वहां का हिस्सा दूसरी छत से भी दिखाई देता था। वहां पर खून के निशान पड़े थे, मगर वह हिस्सा भी दूसरी छत से दिखाई नहीं दे, इसलिए वहां पर लगे तार पर बेडशीट डाल दी गई थी।

मृतक की पहचान के लिए आसपास के लोगों को बुलाया गया। डॉ. राजेश तलवार को भी बुलाया गया। उस समय तक वह अस्थियों को विसर्जित करने के लिए हरिद्वार रवाना हो चुके थे। इस दौरान सिर्फ उन्हें ही बुलाया गया। इस बीच हेमराज के दोस्त व रिश्तेदार भी आए, जिनसे मृतक की पहचान हेमराज के रूप में पुख्ता तौर पर हो गई। भले ही हेमराज के लापता होने पर से पर्दा हट गया था, लेकिन अब कई रहस्य पर ढेरों पर्दे पड़ चुके थे। रहस्य और गहरा गया। अब तक तो सिर्फ एक सवाल था कि कातिल हेमराज था। मगर अब कातिल का ही कत्ल हो चुका था। यानी आरुषि का मर्डर सिर्फ अकेले नहीं, बल्कि यह डबल मर्डर का केस था। पूरा मामला सनसनीखेज। जैसे ही इस बारे में न्यूज चैनलों को जानकारी हुई, महज कुछ मिनट में वहां दर्जनों की संख्या में ओवी वैन लग गईं। सब कुछ लाइव टेलिकास्ट शुरू हो गया। किसी चैनल पर न्यूज थी कि जिस पर था हत्या का शक, उसी का हो गया कत्ल। तो फिर असली कातिल कौन? पूरा केस ही यू-टर्न ले चुका था। मामला उलझ गया था। सवालों के घेरे में कई लोग थे। नोएडा पुलिस भी, क्योंकि कल तक हेमराज की तलाश में एक टीम नेपाल भेजने वाले अधिकारी ने घर के ठीक ऊपर महज कुछ कदम दूर जाकर पड़ताल करना भी मुनासिब नहीं समझा था। इसका नतीजा यह रहा कि केस में कई पेच आ गए थे। वहीं, रिटायर्ड डिप्टी एसपी के. के. गौतम हीरो बन चुके थे। होते भी क्यों नहीं, क्योंकि जिस हेमराज को बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी नहीं खोज सके थे, उसे उन्होंने महज एक घंटे की छानबीन में खोज निकाला था। मीडिया ने भी उनकी इन्वेस्टिगेशन को खूब सराहा। वहीं, नोएडा पुलिस को खूब लताड़ा गया। निकम्मी पुलिस। इस बीच, नोएडा पुलिस ने हेमराज की लाश को तुरंत सील करके उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया, क्योंकि उन्हें पता था कि जितनी देर तक लाश रहेगी, मीडियावाले उतने ही सवाल पर सवाल उठाते रहेंगे और कोई दूसरा काम नहीं हो सकेगा।

इसलिए छत पर कोई फॉरेंसिक जांच भी नहीं कराई गई, महज खानापूर्ति की गई। खैर, यह कोई नई बात नहीं थी। नोएडा पुलिस शायद ही कभी फॉरेंसिक जांच के लिए कोई कदम उठाती हो। अब तक की रिपोर्टिंग में मैंने तो कभी नहीं देखा था। इसलिए इस पर खबर लिखने तक तो ठीक था, लेकिन इस पर पुलिस के सामने ही सवाल उठाने का कोई फायदा नहीं था। लिहाजा, उस समय भी इस पर सवाल नहीं उठाया। हां, थाना प्रभारी दाताराम नौनेरिया से इतना जरूर पूछा कि कल छत पर क्यों नहीं आए जांच करने। इस पर जवाब मिला कि डॉक्टर तलवार ने छत की चाबी ही नहीं दी, जबकि उनसे कई बार छत की चाबी मांगी थी। हालांकि, इसके बाद कोई और सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिला, क्योंकि तब तक वह और अन्य पुलिसकर्मी वहां से जाने लगे थे। वहीं, छत की बाउंड्री पार करके जब दूसरे फ्लैट की छत की तरफ गए तो वहां एक गद्दा देखकर हैरान रह गए। दरअसल, बताया गया कि यह वही गद्दा है, जिस पर आरुषि सोती थी। वह गद्दा एक तरफ से खून से सना हुआ था। हालांकि, कुछ हिस्सा उसका जरूर काटकर रख लिया गया था। पास में एक बेडशीट भी थी। इसके बारे में पता करने पर जानकारी हुई कि उसे कल (यानी 16 मई को) ही रखा गया था। वहां मौजूद मीडिया के सभी सभी लोग बोले, यह कैसे हो सकता है कि जब छत पर लगा ताला टूटा ही नहीं और चाबी गुम थी, तब गद्दे को यहां कैसे रखा गया?

सबके मन में सवाल था, मगर जवाब देने वाला कोई नहीं। अब साफ था कि कोई तो है, जिसने छत पर हेमराज की लाश तो देखी थी, मगर उसके बारे में बताया नहीं। हालांकि, जहां गद्दा था, वहां छत पर आने के लिए एक और दरवाजा था। इसलिए सीधे यह कह देना कि कातिल घर में ही है, जो छत पर आया और चुपके से गद्दा रखकर चला गया, सही नहीं था। मगर सवाल तो था ही। इसके अलावा कई और बातें भी सामने आईं। उसमें छत पर लगी लाइट को तोड़ा जाना। स्विच बोर्ड को भी तोड़ा गया था। यह सबकुछ देखकर न्यूज एंगल के बारे में सोच रहा था, तभी देखा कि एक न्यूज चैनल का कैमरामैन और रिपोर्टर सीढ़ी पर लगे खून को कैमरे में कैद करते हुए लाइव बता रहे थे कि… इस खून को देखकर भी नोएडा पुलिस ने छत पर जाना मुनासिब नहीं समझा। दरअसल, वह चैनल रिपोर्टर उस ब्लड को दिखा रहे थे, जो सीढ़ी पर गिरा था। शायद उसे यह नहीं पता था कि वह निशान पहले नहीं था। हेमराज की लाश को जब छत से नीचे ले जा रहे थे, तब वह खून गिरा था। इसीलिए उसका डायरेक्शन ऊपर से नीचे की तरफ था। फिर भी वह रिपोर्टर उसे सनसनीखेज बनाने में जुटा हुआ था। खैर, अब यह चर्चा होने लगी थी, ऐसा कैसे हो गया कि एक घर में 4 लोग थे। उनमें से 2 लोगों की खौफनाक तरीके से हत्या की जाती है। इसके बाद भी बाकी 2 लोगों को भनक तक नहीं लगती है। इस बीच, एक पुलिसवाले ने बताया कि घटना के बाद से हेमराज और आरुषि दोनों के मोबाइल फोन भी गायब हैं। यह बात जैसे ही सबके सामने आई, कई न्यूज चैनल की ब्रेकिंग खबर बन गई कि मोबाइल फोन से पकड़ा जाएगा कातिल। डबल मर्डर का कातिल फोन से होगा बेनकाब। वहीं, छत पर जहां हेमराज की लाश मिली थी, वहां एक जूते का निशान मिला था। साथ ही, दीवार पर खून से सने पंजे का निशान भी। इसके बारे में पड़ताल होने लगी कि ये कहीं न कहीं कातिल के ही निशान होंगे। मगर, ये किसके हैं, इसका पता नहीं चल पाया।

इस दौरान पुलिस की एक टीम ने पड़ताल करते हुए यह भी बताया कि हेमराज को डॉ. राजेश तलवार के घर पर 8 महीने पहले ही रखा गया था। उसे पुराने नौकर विष्णु ने रखवाया था। विष्णु फिर से नौकरी पर लौटना चाहता था। इस बात को लेकर हेमराज और उसके बीच कहासुनी भी हुई थी। उस मामले में डॉ. राजेश तलवार के क्लिनिक में काम करने वाले कृष्णा ने बीच-बचाव भी किया था। इसलिए पुलिस ने कृष्णा को भी हिरासत में ले लिया था। उससे पूछताछ हो रही थी। इस तरह उस दिन की न्यूज के लिए काफी जानकारी मिल गई थी। इसके बाद ऑफिस पहुंचकर न्यूज लिखने की तैयारी शुरू हो जाती है। रात करीब 8 बजे कुछ और अपडेट के लिए एक पुलिसकर्मी को फोन किया, तब उसने बताया कि रात में ही हेमराज का पोस्टमॉर्टम कराने की तैयारी हो रही है। वहीं, सेक्टर-20 थाना इंचार्ज दाताराम नौनेरिया को लाइन हाजिर कर दिया गया है। यह बड़ी बात थी। इसकी पुष्टि के लिए उस समय के एसएसपी सतीश गणेश से बात की, तब बताया कि हां, यह सच है। मामले में लापरवाही से जांच करने को लेकर डीआईजी सर की तरफ से यह एक्शन लिया गया है। इसके बाद अपनी न्यूज में भी इस जानकारी को अपडेट कर दिया। साथ ही, यह भी पता चला कि यूपी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को भी जांच में लगाया गया है। दरअसल, एसटीएफ मोबाइल की कॉल डिटेल निकालने से लेकर सर्विलांस से जांच करने में एक्सपर्ट है, इसलिए भी उनकी मदद ली गई। लिहाजा, यह डिटेल भी अपनी न्यूज में दे दी।

हालांकि, इस केस की जांच के दौरान साइंटिफिक एविडेंस जुटाने में नोएडा पुलिस ने लापरवाही की हद पार कर दी थी। इस बात का पता इससे लगा सकते हैं कि हेमराज के कमरे से कोई सैंपल नहीं लिया गया था। हेमराज की लाश के बारे में पता लगाने वाले रिटायर्ड डीएसपी ने उस दिन बताया था कि हेमराज के कमरे में शराब की बोतल, एक बीयर की बोतल, पानी की बोतल, 3 गिलास मिले थे। इसके अलावा अन्य भी कई एविडेंस थे, जिनका सैंपल नहीं लिया गया था। इसे देखने के बाद जब उन्होंने पुलिस से कहा, तब आनन-फानन में उसे कब्जे में लिया गया। इसके अलावा घर की डाइनिंग टेबल पर भी महंगी शराब की एक बोतल थी। उसका सैंपल भी नहीं लिया गया था। इस तरह एक दिन बाद तक तो न जाने कितने लोगों के फिंगरप्रिंट उस बोतल पर आ गए होंगे, लेकिन फिर भी सैंपल नहीं लिया गया था। इस बारे में जब नोएडा पुलिस को बताया गया, तब उसे भी कब्जे में लिया गया। इससे इस केस में नोएडा पुलिस की जांच की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

18-19 मई 2008: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से बढ़ी उलझन

अब एक नहीं, डबल मर्डर के एंगल से इन्वेस्टिगेशन हो रही थी। हत्या क्यों और कैसे हुई? किस हथियार से हुई? मर्डर के केस में जब वजह का पता नहीं चलता है, तब हत्या के तरीके से उसकी जानकारी जुटाई जाती है। हत्या किस हथियार से हुई और कहां पर हमला किया गया? डेडबॉडी किस हालत में मिली थी? क्या स्थिति थी? एक क्राइम रिपोर्टर के लिए यह जानना बेहद जरूरी होता है। लिहाजा, इस केस में जिस पर आए दिन सस्पेंस बढ़ता जा रहा था, उसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का पता लगाना बहुत जरूरी था। इसलिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में पता लगाया तो उसकी कॉपी सुबह के वक्त नहीं मिल पाई, लेकिन जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि दोनों की हत्या एक ही हथियार से हुई है। आरुषि और हेमराज दोनों के गले को किसी धारदार हथियार से काटा गया है। इसके अलावा सिर पर किसी भारी वस्तु से पहले हमला किया गया था। क्या आरुषि के साथ कोई असॉल्ट की कोशिश तो नहीं हुई थी, इस पर जवाब मिला कि पीएम रिपोर्ट से तो ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। हालांकि, वैजाइनल स्वैब की स्लाइड बनाकर उसे जांच के लिए भेजा गया है।

वहीं, हेमराज के बारे में पता चला कि उसके शरीर में अल्कोहल नहीं मिला है। इसके अलावा उसके शरीर में कोई खाना भी नहीं मिला था। यानी कत्ल वाली रात उसने खाना नहीं खाया था। इसके अलावा यह भी बताया गया कि उसकी मौत 15 मई की रात में 12 से 1 बजे के बीच हुई थी। इसका मतलब है कि हेमराज उस रात खाने के बजाय किसी बात का इंतजार कर रहा था और बाद में उसका कत्ल हो गया। इसकी पुष्टि के लिए 16 मई की सुबह डॉ. तलवार के घर में जांच करने वाले एक सब इंस्पेक्टर से तुरंत फोन करके पूछा तो उन्होंने बताया कि हां, किचन में एक थाली में पूरा खाना रखा हुआ था। उससे अंदाजा लगाया कि वह खाना हेमराज के लिए रखा गया था।

इस बीच सेक्टर-20 के थाना प्रभारी दाताराम नौनेरिया के लाइन हाजिर होने पर मामले की जांच थाने के सेकेंड प्रभारी सब इंस्पेक्टर संतराम यादव को मिल गई थी। वह ऐसे सब इंस्पेक्टर नहीं थे, जिनसे केस के बारे में कुछ पूछा जाए तो वह खुलकर बता दें। सिवाय, इस जवाब के कि जानकारी तो बड़े अधिकारी देंगे। वहीं, मामले में जांच कर रही एसटीएफ टीम से पता चला कि 16 मई की सुबह जब नौकरानी भारती ने फ्लैट पर पहुंचकर 2-3 बार घंटी बजाई थी, तब नूपुर तलवार आई थी। हालांकि, घर में मेन डोर के बाद भी दो अन्य दरवाजे होने से वह बीच वाले दरवाजे पर ही खड़ी थीं। उस दरवाजे में भी जाली लगी हुई थी, जिससे भारती और नूपुर तलवार एक-दूसरे को देख सकती थी। यह भी बताया कि नूपुर को जब हेमराज नहीं मिला, तब उन्होंने उसके मोबाइल फोन पर कॉल की थी।

कुछ सेकेंड के लिए कॉल रिसीव हुई थी। यह जानकर मैं काफी चौंक गया था। अगर ऐसा है तो क्या हुआ होगा कि उस समय तक कातिल के पास फोन था। अगर था तो क्या वह उस फोन को बंद नहीं कर सकता था। क्या कातिल इतना भी शातिर नहीं था कि वह फोन को ऑफ कर सके। या फिर अगर कुछ सेकेंड के लिए जब कॉल उठा लिया तो इतना तो तय था कि उसने जल्दबाजी में फोन उठाया होगा, ऐसा इसलिए क्योंकि उसके आसपास कोई होगा, जिसे कातिल के पास नए फोन के बारे में पता चल जाता और वह सवाल पूछ लेता, पर ऐसा कौन हो सकता था। एसटीएफ अधिकारी ने यह भी बताया कि सुबह जब कॉल रिसीव हुई थी तो उसकी लोकेशन जलवायु विहार के आसपास ही थी। यानी कातिल जलवायु विहार के आसपास ही रहता था। अब इस केस में इन्वेस्टिगेशन के लिए काफी कुछ मिल रहा था।

हेमराज के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से एक बात का पता चला कि 15 मई की रात करीब 8 बजे निठारी के एक पीसीओ से कॉल की गई थी। यह कॉल किसने की, इसका पता लगाया जा रहा था। इसका पता लगाने के लिए मैं तुरंत निठारी के उस पीसीओ में पहुंचा तो वहां बैठे शख्स ने जवाब दिया कि रोज न जाने कितने लोग कॉल करते हैं, उनमें से कितनों का चेहरा कोई याद रखें। इस तरह किसने फोन किया था, उसका पता नहीं चल पाया। हालांकि, यह खास हो सकता था।

खैर, अब दोपहर का वक्त बीत चुका था। शाम होने वाली थी। तभी पता चला कि लापरवाही बरतने के मामले में एसपी सिटी महेश कुमार मिश्रा का ट्रांसफर इलाहाबाद कर दिया गया है। वहीं, डॉ. राजेश के क्लिनिक में काम करने वाले कृष्णा से पूछताछ की जा रही है। यह भी पता चला कि कुछ दिन पहले कृष्णा ने आर्टिफिशियल दांत बनाने में गड़बड़ी की थी तो तलवार ने उसे डांट दिया था। इस बात को लेकर कृष्णा काफी नाराज रहता था। उसकी नाराजगी किस हद तक थी, इसकी जांच की जा रही थी।

20 मईः खास सुराग नहीं, कई थ्योरी पर पुलिस की जांच

नोएडा डबल मर्डर को तीन दिन बीत चुके थे, लेकिन अब तक हत्या की वजह का पता नहीं चल पाया था। नोएडा पुलिस अभी कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं थी। हालांकि, इसकी जांच में लखनऊ से लेकर लोकल पुलिस और एसटीएफ सभी जुटे हुए थे। कई टीमें विभिन्न एंगल पर जांच कर रही थीं। ऐसे में मैंने आज की न्यूज के लिए पता लगाने में जुट गया था कि आखिर इस केस में हत्या की वजह के पीछे पुलिस कितनी थ्योरी पर काम कर रही है। मैं सुबह से ही जांच में जुटी पुलिस टीम के अधिकारियों से बात करने में जुट गया। शाम 4 बजे तक कम से कम अलग-अलग 10 पुलिस अधिकारियों से बात की। इसके बाद मेरी थ्योरी के लिए 4 एंगल मिले। इन सबका एनालिसिस करने के बाद 4 थ्योरी पर न्यूज लिखने का प्लान बनाया। इसमें पता चला था कि पुलिस को अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है, लेकिन 7 नौकरों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इनमें तलवार के घर में काम कर चुके या फिर वर्किंग से लेकर आसपास के भी कुछ नौकर शामिल थे। सभी नौकरों के फिंगरप्रिंट लेकर मिलान करने का भी काम चल रहा था। हालांकि, इतना तो पता था कि नोएडा पुलिस फॉरेंसिक जांच के आधार पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकती थी। इसलिए इसकी चर्चा तो ठीक है, लेकिन कोई अहम जानकारी मिल जाए, इसके पीछे तो मैं कभी समय बर्बाद ही नहीं करता था। उस समय केस में दिन-रात जांच कर रही पुलिस टीम ने बताया था कि सबसे अहम थ्योरी तलवार के पुराने नौकरों और हेमराज के बीच कोई रंजिश का होना था। इस बारे में आशंका जताई जा रही थी कि अन्य किसी नौकर के साथ हेमराज की कुछ समय से रंजिश चल रही थी।

हालांकि, हेमराज को अपने कत्ल का अंदेशा नहीं था। इसलिए उसने अपने दोस्तों को 15 मई की रात में कमरे पर बुला लिया। हेमराज की कॉल डिटेल से भी पता चला था कि उस दिन उसने कई लोगों से बात की थी। खास बात यह थी कि 15 मई की शाम को ही हेमराज के मोबाइल फोन पर तलवार के क्लिनिक से कॉल आई थी, जबकि उस दौरान डॉक्टर दंपति वहां मौजूद नहीं थे। उस समय कम्पाउंडर ही रहता था। इसके अलावा अन्य नंबरों से भी कॉल आई थी। उसी दौरान नोएडा पुलिस की तरफ से बनाई गई एक टीम ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी। पुलिस को आशंका थी कि चूंकि पुराने नौकर हेमराज के दोस्त थे, इसलिए उसने उन्हें अपने कमरे में पार्टी के लिए बुला लिया था। इसी वजह से रात में उसने खाना नहीं खाया था। इसके बाद कमरे के बाहर टहलते हुए आरुषि को इस बात का अंदाजा लग गया होगा। भले ही आरुषि तत्काल अपने परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन अगले दिन बता सकती थी। इसीलिए उसे मार डाला गया होगा।

दूसरी थ्योरी थी कि डॉक्टर तलवार की आपसी रंजिश तो नहीं थी, जिसमें साजिश के तहत पहले आरुषि को, फिर नौकर को मार डाला गया हो। यही वजह है कि कातिल को घर के अंदर की सारी जानकारी थी। वहीं, एसटीएफ की टीम लव एंगल से भी जांच कर रही थी। दरअसल, पुलिस का कहना था कि तलवार दंपति के अलग-अलग बयान लेने पर कई अंतर भी मिले। इसके अलावा आरुषि की चैट डिटेल से लेकर अन्य कई ईमेल से भी कुछ बातें सामने आई हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए यह जांच की जा रही है कि लड़की या अन्य किसी से जुड़ा कोई लव एंगल तो नहीं है। इस बीच 20 मई की दोपहर में ही एक न्यूज चैनल ने फ्लैट के नीचे गैराज में बने क्लिनिक में खून के निशान होने की खबर चला दी। बंद क्लिनिक की खिड़की से वीडियो शॉट के आधार पर उसने ऐसा दावा किया था। इसके बाद तो वहां भीड़ जुट गई। सभी चैनलों के कैमरे उसी तरफ टिक गए। उस समय पुलिस की एक बार फिर हालत खराब हो गई थी, क्योंकि इससे पहले हेमराज की डेडबॉडी को तलाशने में फ्लैट की छत पर नहीं जा सके थे और अब गैराज में खून के निशान मिलने की बात सामने आ गई। हालांकि, जब गैराज को खोला गया तो वहां से खून नहीं मिला, बल्कि वहां लाल रंग का एक कागज पड़ा हुआ था। यह देखकर पुलिस ने सबसे ज्यादा राहत की सांस ली।

 

 मईः कॉन्ट्रैक्ट किलिंग से लेकर कसाई तक के कयास

यह दिन जांच के एंगल से काफी खास रहा था। सुबह से भले ही कुछ खास सुराग नहीं मिलने की बात चल रही थी, लेकिन दोपहर बाद कई बातें सामने आईं। दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी अचानक जलवायु विहार पहुंचे। इनमें दिल्ली क्राइम ब्रांच के तत्कालीन एसीपी जॉय टिर्की व अन्य धुरंधर पुलिसकर्मी थे। बताया गया कि क्राइम ब्रांच के डीसीपी अनिल शुक्ला और उस समय के नोएडा एसएसपी सतीश गणेश दोनों 1996 बैच के ही आईपीएस अधिकारी हैं, और एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं। इसके बाद ही दिल्ली क्राइम ब्रांच में तैनात एसीपी जॉय टिर्की व उनकी टीम को नोएडा में जांच के लिए भेजा गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस की तरफ से वह आधिकारिक जांच करने नहीं आए थे। घंटों तक घटनास्थल का निरीक्षण करने और पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने इस केस को आसान और जल्द खुलासा हो जाने वाला बताया। यह भी बताया कि पूरा मामला कॉन्ट्रैक्ट किलिंग जैसा लग रहा है, इसलिए

अभी हत्या में प्रयुक्त हथियार नहीं मिल रहा है। हथियार मिलने पर केस का खुलासा हो जाएगा। वहीं, दिल्ली पुलिस क जांच करने पर यूपी एसटीएफ के अधिकारी थोड़ा नाराज हो गए। उनका कहना था कि जब केस की जांच में वह दिन-रात जुटे हैं तो फिर दिल्ली पुलिस से मदद लेने की क्या जरूरत? इस बीच यह बात भी सामने आई थी कि एसटीएफ अधिकारी जिस एंगल पर ज्यादा शक जता रहे हैं, उससे लखनऊ के अधिकारी नाराज हो रहे हैं। खैर, शाम होते ही इस मामले में लखनऊ से बड़ा अपडेट आया।

उस समय के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) बृजलाल ने मीडिया को बयान दिया कि हत्यारा या तो कसाई है या डॉक्टर। एडीजी ने कहा कि जिस सफाई से कत्ल किए गए हैं, वह कोई डॉक्टर या कसाई ही कर सकता है। इससे कुछ न्यूज चैनल पर डबल मर्डर में आरुषि के घरवालों के शामिल होने की चल रही खबरों की अटकलों को और हवा मिल गई। साथ ही, एडीजी ने यह भी कह दिया कि जिस तरह से आरुषि का गला काटा गया है उससे साफ जाहिर होता है कि यह काम किसी प्रोफेशनल डॉक्टर या कसाई का ही है।

वहीं, इस बीच आरुषि के माता-पिता से जांच अधिकारी अनिल समानिया और एसटीएफ के अधिकारी ने दो घंटे से ज्यादा देर तक पूछताछ की थी। हालांकि, उनके बीच में क्या बात हुई, उसका खुलासा नहीं हो पाया था। इसके अलावा पुलिस की अन्य टीमों ने हथियार की तलाश में 100 से ज्यादा संदिग्ध लोगों से पूछताछ की थी, मगर कोई खास सुराग नहीं मिल पाया था।

22 मईः माता-पिता पर गहराया शक

आज सुबह से ही ऐसा लग रहा था कि आरुषि केस में कुछ खास खुलासा होगा। दरअसल इससे पहले यूपी के तत्कालीन एडीजी बृजलाल कह चुके थे कि पुलिस को अहम जानकारी मिल चुकी है। यह भी कह चुके थे कि कातिल या तो कसाई है या फिर डॉक्टर। ऐसे में यह माना जा रहा था कि पुलिस को काफी हद तक माता-पिता पर शक है, लेकिन सबूत नहीं मिल रहे हैं। इस बीच मीडिया को अलग-अलग तरीके से कुछ इनपुट दिए जा रहे थे। मसलन, डॉ. तलवार की कॉल डिटेल से लेकर हेमराज के फोन की डिटेल भी मीडिया को मिल गई थी। इससे पता चला कि जब हेमराज के फोन पर सुबह तलवार के घर से कॉल की गई थी, तब उसकी लोकेशन जलवायु विहार में ही थी। इसके अलावा डॉ. राजेश तलवार इसलिए भी सवालों के घेरे में आ गए, क्योंकि उन्होंने बयान दिया था कि नौकरानी भारती सुबह 6 बजे घर पहुंची तो घटना का पता चला। इसके बावजूद पुलिस को सूचना एक घंटे बाद दी गई। उससे पहले डॉक्टर तलवार ने अपने रिश्तेदारों को जानकारी दी, लेकिन किसी पड़ोसी को तुरंत नहीं बताया। इसके अलावा घटना के बाद मीडिया के सामने आने में डॉक्टर दंपति दोनों बचते रहे थे। ऐसा क्यों? इसके अलावा पुलिस ने बताया था कि दोनों के बयान भी अलग-अलग थे। दिन-भर यही सब चलता रहा। मीडिया की तरफ से पुलिस पर लगातार दबाव बन रहा था कि वह कुछ स्पष्ट करे, कि आखिर क्या हो रहा था केस में? क्या खुलासा हो रहा है? इसके बाद एसएसपी सतीश गणेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई।

यह पता चलने पर प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रिपोर्टर तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे। सभी न्यूज चैनल की ओवी वैन वहां लग गईं। हर जगह एसएसपी लाइव हो गए। एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तो नहीं, लेकिन ऑनर किलिंग की तरफ इशारा कर दिया। साथ ही, केस में कई अहम संकेत भी दिए। एसएसपी ने उस समय कहा था –

हम लोगों ने कई तरह के साक्ष्य एकत्र किए हैं। मगर, दोनों हत्या के पीछे की वजह के बारे में अभी थोड़ी ही जानकारी मिल पाई है। यह ऑनर किलिंग का मामला हो सकता है या फिर किसी व्यक्ति के प्रति जान लेने या देने की हद के लगाव का भी नतीजा हो सकता है। अभी तक की इन्वेस्टिगेशन से पता चला है कि कातिल किसी एक शख्स की ही हत्या करना चाहता था, मगर इससे उसकी पहचान उजागर हो सकती थी, इसलिए पहचान बचाए रखने के लिए दूसरा मर्डर भी करना पड़ा। ऐसा हो सकता है, मगर अभी यह कहना आसान नहीं है कि आखिर पहले किसकी हत्या हुई।

हत्या के लिए कोई जहर तो नहीं दिया गया, इसका भी पता लगाया जा रहा है। इसलिए विसरा को प्रिजर्व किया था। वैसे तो हथियार से चोट के निशान मिले हैं, फिर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए हमलोगों ने डॉक्टर को खास रिक्वेस्ट की है। कई तरह के लोगों पर संदेह है और उनसे पूछताछ कर मोटिव का पता लगा रहे हैं। आई थिंक, मोस्ट ऑफ द अस, इस कमरे में मीडिया के जितने भी लोग बैठे हैं, हम सभी लोग अब जान चुके हैं कि एक सिंगल मोटिव था। हालांकि, अभी कई थ्योरी हो सकती हैं। सभी पर इन्वेस्टिगेशन भी चल रही है। जैसे घटना किसने की है? क्यों की है? इसमें आपकी (मीडियाकर्मियों की) भी मदद चाहिए। वैसे आपने काफी मदद की है। पुलिस को अहम जानकारी दी है, मगर मैं यानी पुलिसवाले लीगल पैरामीटर के दायरे में ही रहकर कार्रवाई कर सकते हैं। आपलोग आशंका के आधार पर भी स्टोरी कर सकते हैं, मगर हमलोग नहीं।  हमारी सीआरपीसी और आईपीसी की मजबूरी है, इसलिए आपसे आग्रह करता हूं कि संशय हो तो पूछ सकते हैं। दरअसल, एक सिद्धांत है कि 100 दोषी छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष को सजा नहीं मिल जाए। सबको पता है कि कातिल कौन है, मगर साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए अभी देर हो रही है।

इस तरह उस समय के एसएसपी सतीश गणेश ने कौन है कातिल, इस तरफ पूरी तरह इशारा कर दिया था,मगर उसे गिरफ्तार करने के लिए साक्ष्य नहीं जुटा पाए थे, इसलिए अपनी मजबूरी भी बता दी। हालांकि ऑनर किलिंग का संकेत देते हुए साफ कर दिया था कि आखिर इस हत्या का मोटिव क्या रहा होगा। इस तरह मीडिया के लोगों को सबसे बड़ी न्यूज मिल गई थी, मगर कुछ सवाल थे कि आखिर ऑनर किलिंग कैसे की गई? क्या तलवार ने अकेले ही कत्ल कर दिया? इस तरह के कई सवाल सभी मीडियाकर्मी पूछना चाहते थे। सवाल पूछे भी, मगर एसएसपी सतीश गणेश ने यह कहकर जवाब नहीं दिया कि एक-एक सवाल करके बहुत ज्यादा हो जाएंगे, इसलिए आपलोग कागज पर सवाल लिखकर दे दें। उस सवाल का जवाब हम खुद ही आपको दे देंगे। यह सुनकर सभी हैरान रह गए। हमलोग तमाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में इससे पहले भी गए थे, मगर कहीं भी खासतौर पर किसी क्रिमिनल केस में अधिकारी ने कागज पर सवाल लिखकर पूछने के लिए नहीं कहा था, इसलिए काफी अजीब लगा। तभी एक पत्रकार ने आखिरकार बोल ही दिया कि मीडियाकर्मी कोई भोपू नहीं है, जिसमें जो चाहोगे, वही आवाज आएगी। सवाल का जवाब देना ही पड़ेगा। इसके बाद एसएसपी पर दबाव बढ़ा, तब उन्होंने कुछ सवालों के जवाब दिए। मसलन, हत्या में निशाने पर कोई एक ही था, मगर दूसरी भी करनी पड़ी। जहां तक हथियार का सवाल है तो उस पर लगातार पड़ताल हो रही है। इसलिए प्लीज पुलिस को कुछ वक्त दीजिए। अगले 24 घंटे में आपको फिर से जानकारी दी जाएगी। इस तरह मीडियाकर्मी शांत हुए। इसके बाद सभी की खबर ऑनर किलिंग पर फोकस हो गई। अगले दिन सभी मीडिया में ऑनर किलिंग की खबर प्रमुखता से आई।

इस बीच, रात में जानकारी मिली कि डबल मर्डर केस के जांच अधिकारी एक बार फिर बदल गए। दरअसल, दोपहर में पता चला कि जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अनिल समानिया की तबीयत अचानक खराब हुई थी। रात में पता चला कि उन्हें अस्पताल में एडमिट करना पड़ा, इसलिए जांच प्रभावित होगी। लिहाजा, दोपहर से लेकर रात तक नए आईओ (इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर) की तलाश हो रही थी। इसके बाद देर रात में सब इंस्पेक्टर जगवीर मलिक का नाम फाइनल हो गया। उन्हें सेक्टर-20 थाने का इंचार्ज बनाया गया और आरुषि-हेमराज मर्डर केस का आईओ भी।

23 मईः कातिल बेनकाब, तलवार गिरफ्तार

दिन शुक्रवार। सुबह से ही नोएडा के सेक्टर-20 थाने से लेकर जलवायु विहार के आसपास मीडिया का पहरा लग गया था। कई मीडियाकर्मियों ने तो पुलिस कंट्रोल रूम में ही डेरा डाल रखा था। हर तरफ एक ही सवाल था कि आखिर आज क्या होगा? वजह यही थी कि एक दिन पहले ही एडीजी ने डॉक्टर से कसाई तक के कातिल होने की बात कही थी। इस बीच सभी चैनलों पर रोजाना सुबह-शाम बहस होती थी कि यह ऑनर किलिंग ही है। भला ऐसा कौन मां-बाप होगा, जो अपनी इकलौती बेटी की हत्या होने पर चीख-चीखकर रोएगा भी नहीं। चैनलों पर होने वाली बहस के पैनल में आए लोग यही कहते थे कि कभी भी तलवार पति-पत्नी को रोते हुए नहीं देखा। इसके अलावा इतनी जल्दी क्या थी कि बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया और घर की सफाई भी करा दी।

ऐसे में उन पर ही कत्ल करने का पूरा यकीन है। पैनल में टीवी पर आकर बहस करने वालों का यह यकीन 23 मई को हक़ीकत में बदल गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तलवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। थोड़ी देर में पुलिस कंट्रोल रूम में आईजी गुरदर्शन सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। देशभर की मीडिया के लोग पुलिस कंट्रोल रूम में जुट गए। कॉन्फ्रेंस हॉल के बाहर तक मीडिया का जमावड़ा लग गया था। कई मीडियाकर्मी तो हॉल के बाहर की खिड़की के पास खड़े होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को कवर कर रहे थे। कुछ देर में आईजी गुरदर्शन सिंह के साथ डीआईजी और एसएसपी हॉल में पहुंचे और फिर शुरू हुई तलवार की गिरफ्तारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस। आईजी गुरदर्शन सिंह कहते हैं…

…अब तक जो विवेचना की गई है, जो तथ्य इकट्ठा किए गए हैं, उस आधार पर इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला जो प्राइम अक्यूज्ड है, जिसने अपनी स्टूडेंट बेटी का कत्ल भी किया और सर्वेंट का भी कत्ल किया। 16 तारीख को जब श्रुति और हेमराज… सॉरी आरुषि.. तलवार के कत्ल की सूचना मिली, तब पुलिस तत्काल राजेश तलवार के घर पर गई। राजेश तलवार ने थाने पर जो अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई, उसमें अपने सर्वेंट हेमराज को नामजद किया। पुलिस को जब घटनास्थल पर अपना काम करना था, उस समय आरुषि के पिता राजेश तलवार द्वारा सेंटिमेंटल अटैक के माध्यम से पुलिस को ये कहा गया कि आप घर से जाइए, शीघ्र जाइए और जो कातिल है हेमराज, उसको पकड़िए। आप यहां पूछताछ करते रहेंगे, हमारे दरवाजा खोलने की बात करेंगे, तब तक कातिल कहीं निकल जाएगा।

इसके बाद राजेश तलवार द्वारा और उसके सहयोगियों द्वारा आरुषि की डेडबॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे जाने के बाद उस गद्दे को जिसपर आरुषि का कत्ल हुआ था, उसे छत पर रखा गया। और जिस सीढ़ी का दरवाजा खोला गया था गद्दा रखने के लिए, आप जानते हैं उस छत पर दो फ्लोर की सीढ़ी है। वो अपनी छत का दरवाजा न खोलकर पड़ोसी की छत का दरवाजा खोला था। जबकि दूसरी छत पर से भी अपनी छत पर जाया जा सकता था। क्योंकि डेडबॉडी हेमराज की उनकी अपनी छत पर पड़ी थी संभवतः वह अपनी छत पर साथियों के साथ गद्दे को नहीं रखना चाहते थे।

नंबर-2 कत्ल को लगभग… काफी समय हो गया था…घंटे हो गए थे, गर्मी की वजह से बॉडी सड़ने लगी थी… स्मेल देने लगी थी, इसलिए अपनी छत की तरफ वो बाकी के सर्वेंट्स को नहीं ले गए। तीसरा बिंदु, 17 तारीख को हेमराज की डेडबॉडी उन्हीं की छत पर मिलती है। कई सारे बिंदु ऐसे हैं, जो इन्वेस्टिगेशन में अहम रोल अदा करते हैं। पहला बिंदु, उनके घर में थ्री लेयर सिक्युरिटी है। पहला मेन दरवाजा है और उसके बाद फिर 2 दरवाजे हैं। पहला दरवाजा, जिसमें चाबी लगाकर तीन बार घुमाना पड़ता है। इसके बाद लकड़ी का दरवाजा है। एक बाहर वाला दरवाजा है। अगर कोई आदमी बाहर से कत्ल करने आता तो फोर्सिबल एंट्री करके आता। इसका मतलब है कि बाहर से किसी ने भी फोर्सिबल एंट्री नहीं की है। दूसरी बात रात लगभग 12 बजे तक राजेश तलवार ने दूरभाष पर जानने वालों से बात की है। इसका मतलब है कि रात 1 बजे के आसपास तक साउंड स्लीप में नहीं होंगे। जबकि कत्ल का समय लगभग इसी समय का है। कत्ल भी लगभग 1 बजे के आसपास। आधे घंटे ऊपर-नीचे। वैसे जहां ट्रैफिक न हो। जहां लोग समय पर सो जाते हों। वहां शांति बनी रहती हो, वहां थोड़ी सी आहट भी किसी भी व्यक्ति को उठने पर मजबूर कर देती। जिसकी छत पर कत्ल हो रहा हो, वहां आवाज हुई होगी। कूलर का ढक्कन खोलकर डेडबॉडी पर उसे रखा गया, ताकि दूर से न कोई देख सके। उसे छुपाने की कोशिश की गई। जो छत पर जाने के लिए जीने (सीढ़ी) का दरवाजा है, उसे खोलने के लिए थोड़ी ताकत लगानी पड़ती है। अगर छत पर दो लोग चल रहे हों तो भी नीचे सो रहे लोगों को इसकी भनक नहीं लगती है, कहीं न कहीं शक पैदा करता है। इसके अलावा दूसरी खास बात कि आरुषि के कमरे का दरवाजा और राजेश तलवार जहां सोते हैं, उस कमरे के दरवाजे के बीच की दूरी 4-5 फुट ही होगी। अगर सोते समय आरुषि के सिर और राजेश के सिर की दूरी को देखा जाए तो 6 से साढ़े 6 फुट की दूरी होगी। ऐसे में रात में सोते समय महज इतनी दूरी होने पर मर्डर के समय कोई आहट नहीं आए, मुश्किल से डाइजेस्ट होता है। साथ ही, जिस कमरे में सर्वेंट हेमराज रहता था, उसमें दो दरवाजे हैं। एक दरवाजा तलवार के कमरे में खुलता है और दूसरा तलवार के सिक्युरिटी के लिए लगाए गए दो दरवाजों के बीच खुलता है। वहीं, कोई भी कातिल दरवाजे से बाहर आएगा और कत्ल करने के बाद ताला लगाकर जाएगा, ये बात अस्वाभाविक लगती है। इसके अलावा घर के किसी मेंबर भी ने पूछताछ के दौरान तसल्ली भरा जवाब नहीं दिया था।

इस घटना में जो मोटिव रहा है, वह मुख्य रूप से आरुषि का कत्ल करना था। हेमराज का इसलिए कत्ल किया गया, ताकि कोई चश्मदीद न रहे। इस तरह कोई साक्ष्य नहीं बच पाता। ऐसे में चश्मदीद के नहीं रहने से केस के अनावरण में दिक्कत आती है। इसलिए पुलिस भी केस में सबूत के लिए अन्य एविडेंस जुटा रही है। इस केस में सर्कमटासेंस एविडेंस (परिस्थितिजन्य साक्ष्य) की भूमिका काफी अहम है। उसी की पड़ताल में यह सामने आया है कि डॉ. राजेश का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था। इस अफेयर की जानकारी उनकी इस बच्ची को भी थी, जिसका कत्ल हो गया। इसके अलावा घर के नौकरों को भी इस बात की जानकारी थी। नौकरों ने अपने जान-पहचान के लोगों से भी इस बात की चर्चा की थी। इससे डॉ. साहब खफा थे। मृतक हेमराज ने अपने जान के खतरे के बारे में कुछ लोगों को बताया भी था। काश! उसने पुलिस को इस बारे में बता दिया होता तो उसकी जान बच सकती थी।

अब तक की विवेचना और जो तथ्य एकत्र किए गए हैं, उसके अनुसार इस जघन्य अपराध को करने वाला प्राइम अक्युज्ड राजेश तलवार है, जिसने अपनी स्टूडेंट बेटी और सर्वेंट हेमराज दोनों का कत्ल कर दिया। प्राइम अक्युज्ड को अरेस्ट कर लिया गया है और बाकी विवेचना जारी है। इस विवेचना की गहराई से जांच की जाएगी।

इस तरह आईजी गुरदर्शन सिंह ने अपनी बात रखी थी। इसके बाद मीडिया की तरफ से सवाल-जवाब शुरू हो गए। एक साथ कई सवाल, लेकिन इन सवालों में यह कॉमन था कि आखिर घटनाक्रम क्या था 15 मई की उस रात का। इस पर आईजी ने बताया कि…

अब तक की विवेचना के आधार पर सर्वेंट हेमराज की हत्या पहले की गई। इसके बाद श्रुति की हत्या की गई। सॉरी, आरुषि की हत्या की गई। (फिर से श्रुति का नाम सुनकर मीडिया वाले भी हंसने लगते हैं कि आखिर आरुषि को आईजी बार-बार श्रुति क्यों बोल रहे, जबकि पूरे देश में लोग आरुषि का नाम जान चुके हैं)। वह यह भी बताते हैं कि आरुषि और हेमराज की हत्या में एक समान तरीका अपनाया गया।

इस बीच सवाल पूछा जाता है कि क्या आरुषि तलवार की अपनी ही बेटी थी। दरअसल, एक बड़े मीडिया ग्रुप ने आरुषि को तलवार दंपति की सगी बेटी होने पर सवाल उठाया था। इस पर आईजी ने जवाब दिया कि हां पूछताछ में पता चला है कि आरुषि उनकी सगी बेटी थी।

इसके बाद फिर से रात की घटना के बारे में विस्तार से बताने के लिए कहा जाता है, तब आईजी बताते हैं कि सबसे पहले छत पर हेमराज की हत्या की गई, लेकिन उसे छत पर ले जाने में कोई फोर्स नहीं किया गया था। इससे साफ होता है कि हेमराज छत पर तभी जाएगा, जब वह किसी की बात मानता हो। राजेश ही उसे छत पर ले गया और मारा। अभी तक उसी के कत्ल में शामिल होने का पता चला है, बाकी जांच अभी चल रही है। बेटी उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में जानती थी। अभी संभव नहीं है कि बाकी और पूरी डिटेल बता दी जाए। इस बात की भी चर्चा थी कि हेमराज और आरुषि दोनों काफी करीब आ गए थे। इस बात को राजेश बर्दाश्त नहीं करते थे। भले ही उनका खुद का कैरेक्टर कितना भी खराब क्यों न हो।

15 मई की रात में करीब 11:30 बजे राजेश अचानक आरुषि के कमरे में आए तो ऑब्जेक्शनेबल हालत में देख लिया। मेरा मतलब कॉम्प्रमाइजिंग पोजिशन नहीं है। इसके बाद डॉ. राजेश समझाने के बहाने हेमराज को छत पर ले गया और वहां पर कत्ल कर दिया। इसके बाद वह कमरे में आया और फिर व्हिस्की भी पी। इसके बाद आरुषि के कमरे में गया और पहले उसने किसी हैवी सामान से सिर पर मारा और फिर शॉर्प वेपन से गला काट दिया। इसके बाद सुबह आसपास के लोगों को भी कुछ नहीं बताया। इसके बजाय परिजनों और दोस्तों को घटना की जानकारी दी। घटना के समय नूपुर घर पर ही थी और वह कत्ल में शामिल थी या नहीं, इस पर अभी जांच चल रही है। हमारे पास पर्याप्त एविडेंस हैं। वेपन की रिकवरी के लिए राजेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।

इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

इस कॉन्फ्रेंस के शुरू होने से ही सभी न्यूज चैनल पर ब्रेकिंग चल रही होती है। अब तो बड़े बड़े पैकेज चलने लगते हैं। पापा ही कातिल। मगर, हत्या किससे की गई, उस हथियार को लेकर जवाब नहीं मिल पाया था। खैर, इस खबर को कैसे लिखा जाए और कैसे नहीं, इसे लेकर काफी माथापच्ची हुई। नवभारत टाइम्स अखबार ने इस खबर को बहुत ही निष्पक्ष होकर प्रकाशित किया था। भले ही पुलिस ने कातिल कह दिया, लेकिन उस समय तक कोर्ट की मुहर नहीं लगी थी। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के कैरेक्टर पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठा देना भी सही नहीं था। इसलिए नवभारत टाइम्स ने हेडिंग दी : डॉ. राजेश तलवार गिरफ्तार। साथ में लिखा कि डबल मर्डर के पीछे अवैध संबंध। इसके अलावा कई अनसुलझे सवालों को भी उठाया गया। अखबार ने अपनी राय भी दी कि एक पिता पर लगाए आरोपों को तभी सही माना जाए, जब अदालत भी अपना फैसला दे दे।

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