भूमि सर्वेक्षण विभाग में नौकरी का विज्ञापन देखकर कहीं आप भी तो नहीं बन रहे ठगी के शिकार


पिछले 3 साल में 9 राज्यों में हजारों लोगों से करोड़ों की कर चुके हैं ठगी
देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत फर्जी भूमि सर्वेक्षण विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा जा रहा है। पिछले तीन साल में देश के 9 राज्यों में हजारों युवकों से करोड़ों रुपए की ठगी की जा चुकी है। माना जा रहा है कि बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के नाम पर यह देश का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा है। इस जालसाजी को अंजाम देने के लिए नोएडा-गुड़गांव में फर्जी पते पर ऑफिस दिखाकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में अखबार में विज्ञापन देकर बेरोजगारों से ठगी हो रही है। आलम यह है कि इस मामले में ठगी के शिकार हुए सैकड़ों लोग ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिल्ली स्थित निर्माण भवन कार्यायल में फोन करके शिकायत भी कर चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अक्टूबर 2017 में सीबीआई में मामला भी दर्ज हुआ। इसके बाद भी जालसाज पिछली बार की तुलना में कार्यालय का पता और अपना नाम बदलकर सक्रिय हो गए हैं। इसकी पड़ताल की तब पता चला ये जालसाज अपना नाम व नंबर बदलकर इस बार ग्रेटर नोएडा का पता देकर पिछले एक महीने से उत्तराखंड के नैनीताल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में अखबार में विज्ञापन देकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। पिछले कुछ समय में ही सिर्फ एक जिले के ग्रामीण इलाके से 5 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं।

ऐसे कर रहे हैं ठगी

अखबार में सरकारी नौकरी मिलने जैसा लुभावना विज्ञापन
सबसे पहले जलसाज ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत भारतीय भूमि सर्वेक्षण विभाग में भूमि सर्वेयर की आ‌वश्यक्ता बताकर किसी नामी अखबार में विज्ञापन निकाल देते हैं। उस विज्ञापन में लिखा होता है कि जैसा कि आप जानते हैं भारत सरकार 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत लागू मनरेगा कार्यक्रम के लिए भूमि सर्वेक्षण अधिकारी की नियुक्ति कर रही है। इस पद के लिए 20,550 रुपए मासिक वेतन निर्धारित है। इसके लिए उम्मीदवार को अपने निवास स्थान से 60 किमी के दायरे में कार्यरत होना पड़ेगा। महीने की प्रत्येक 7 तारीख को वेतन आपके दिए एकाउंट में पहुंच जाएगा। इसके लिए उम्मीदवार दिए हुए मोबाइल नंबर पर मैसेज कर आवेदन कर सकता है।

मैसेज करते ही 10वीं का सर्टिफिकेट व प्रमाण पत्र लेकर 10 दिनों में नौकरी का लेटर

जालसाज पहले से ही 10वीं पास लोगों के लिए घर के आसपास ही 20 हजार रुपए महीने की कमाई का लालच देते हैं। ऐसे में काफी संख्या में युवा आवेदन करते हैं। कोई भी युवक जैसे ही उनके नंबर पर अपना नाम व हाई स्कूल में पास होने का नंबर भेजता है तब जालसाज उसे तुरंत फोन कर देते हैं। इसके बाद उसे सभी सर्टिफिकेट को स्कैन करके, चरित्र प्रमाण पत्र बनवाकर उसे ईमेल करने के लिए कहते हैं। सर्टिफिकेट मिलने के 10 दिनों के भीतर ही ईमेल आईडी पर भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि सर्वेक्षण विभाग के अशोक स्तंभ वाले लेटर पैड पर 5 पेज का जॉब ऑफर का लेटर मिल जाता है। इस लेटर को भेजकर जालसाज कॉल कर बधाई देते हुए कहते हैं कि आपके 10वीं की मार्कशीट और चरित्र सर्टिफिकेट को देखकर हमारी कमेटी ने आपका चयन कर लिया है। अब आप भूमि सर्वेक्षण विभाग के तहत 25 साल के लिए भूमि सर्वेक्षण अधिकारी बन चुके हैं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपको 750 रुपए प्रोसेसिंग फीस सरकारी बैंक पंजाब नैशनल बैंक के एकाउंट में जमा करना होगा। कम रकम देखते हुए कोई भी शख्स बेझिझक पहले 750 रुपए जमा करा देता है।

प्रोसेसिंग फीस के बाद लैपटॉप व कीमती सामान देने के एवज में मांगते हैं 15,500 रुपए

हाल में ही उत्तराखंड के नैनीताल जिले के राम नगर में इसी तरह का विज्ञापन देखकर जालसाजी के शिकार हुए चंदन सिंह रावत से जब दैनिक भास्कर ने संपर्क किया तब उन्होंने बताया कि उनके आवेदन करने के बाद नौकरी का लेटर भी मिल गया। इसके बाद लालच में आकर पहले 750 रुपए की प्रोसेसिंग फीस भी जमा कर दी। उसके बाद एक और लेटर मिला जिसमें लिखा था कि भूमि सर्वेक्षण की ट्रेनिंग के लिए आपको आधुनिक मशीन व लैपटॉप दिया जाएगा। उसकी सिक्योरिटी के लिए 15,500 रुपए जमा करना पड़ेगा। ये पैसे आपको हर महीने दिए जाने वेतन के साथ किस्तों में लौटा दिया जाएगा। पैसे जमा करने के एक दिन की देरी हुई तब हितेश शर्मा जो खुद को विभागीय अधिकारी बताता था, उसका फोन आया। उसने पैसे जल्द जमा कराने के लिए कहा जिस पर असमर्थतता जताई तब उसने पहले 5 हजार रुपए और फिर कुछ दिन बाद 10 हजार रुपए जमा करने की सलाह दी। इसके तुरंत बाद उसके बताए पीएनबी के एकाउंट में 5 हजार रुपए जमा करा दिए थे। उन्होंने बताया कि उनके नैनीताल के आसपास के एरिया में 50 से ज्यादा लोगों से इसी तरह की ठगी की जा चुकी है और उनसे साढ़े 15 हजार रुपए भी जमा करा लिए और फिर कोई अधिकारी भी नौकरी की ट्रेनिंग देने नहीं पहुंचा।

फर्जीवाड़े का ऐसे पड़ताल कर किया खुलासा

1 – भूमि सर्वेक्षण विभाग : फर्जी

क्या किया :
सबसे पहले तो यह पता लगाया कि देश के विभिन्न राज्यों में जिस ग्रामीण विकास मंत्रालय से संबंद्ध भूमि सर्वेक्षण विभाग में नौकरी देने के नाम पर आवेदन मंगाए जा रहे हैं क्या वह वाकई में है या नहीं है?

क्या मिला : इसका पता लगाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव से बात की तब उन्होंने भूमि संसाधन विभाग के अंडर सेक्रेटरी करम चंद से बात कराई।

– अंडर सेक्रेटरी करम चंद ने स्पष्ट किया कि सबसे पहले देश में कोई भूमि सर्वेक्षण विभाग ही नहीं है।

– मंत्रालय के अंतर्गत जो विभाग है उसका नाम भूमि संसाधन विभाग है।

– इस विभाग में भर्ती भी सिर्फ एसएससी और यूपीएससी के जरिए की जाती है। उसके लिए जो फीस निर्धारित है बस वही परीक्षा करने वाली एजेंसी लेती है।

– भूमि संसाधन विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यालय भी दिल्ली के निर्माण भवन में है, न की नोएडा-ग्रेटर नोएडा या गुड़गांव में है जहां का पता देकर फर्जीवाड़ा हो रहा है।

2- लेटर हेड पर लगे सरकारी लोगो : फर्जी

क्या किया :
भूमि सर्वेक्षण विभाग की तरफ से आवेदन के बाद जिस लेटर हेड पर नौकरी का ऑफर दिया गया था, उसकी बारीकी से पड़ताल की गई।

क्या मिला: ( दो लोगो – एक स्तंभ और एक कृषि का) – लेटर हेड पर अशोक स्तंभ और एक और कृषि से जुड़ा दिखा। अशोक स्तंभ तो भारत सरकार के नाम पर कहीं से ले सकते हैं मगर दूसरा कृषि वाला लोगो ग्रामीण विकास मंत्रालय में किसी डॉक्युमेंट या वेबसाइट पर नहीं मिला।

– कृषि वाले लोगो की पड़ताल शुरू की तब वह उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम की वेबसाइट पर मिला। यह विभाग 1978 में यूपी सरकार के एक उपक्रम के रूप में गठित हुआ था।
– इसलिए दो अलग-अलग जगह से लोगो को उठाकर इस लेटर हेड में प्रयोग में लाए जाने की बात सामने आई। जिससे फर्जीवाड़े का पता चला।
2015 से हुई ठगी की शुरुआत
सबसे पहले जून 2015 में ही यूपी के बरेली, सुल्तानपुर एरिया में अखबार में विज्ञापन देकर भूमि सर्वेक्षण विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की शुरुआत हुई थी। इस मामले में बरेली के रहने वाले अमित ने तत्कालीन डीएम से शिकायत की थी। हालांकि, पुलिस ने कुछ लोगों से ठगी होने और फर्जीवाड़ा करने वालों का गुड़गांव का पता देखकर जांच पूरी नहीं की थी।


2016-17 में कई राज्यों में हुई ठगी

जून 2016 में ठगी के शिकार हुए महाराष्ट्र के शरद हिवाले ने बताया कि वह अपने स्थानीय थाने में कई बार शिकायत लेकर पहुंचे मगर कभी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद ऑनलाइन पोर्टल पर अपना नंबर देते हुए लोगों को जागरूक किया तब पता चला कि यह जालसाजों का यह गैंग अलग-अलग कई राज्यों में लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर प्रत्येक से 15 से 30 हजार रुपए तक ठग चुके हैं।

अभी उत्तराखंड में भी नहीं हुई शिकायत, तब ग्रेटर नोएडा में पता चला
अभी मार्च 2018 में भूमि सर्वेक्षण विभाग के नाम पर ही उत्तराखंड के रामनगर में ठगी हो रही है। पीड़ित चंदन सिंह रावत ने जब विभाग पर ग्रेटर नोएडा का पता देखा तब उन्होंने खुद ऑफिस आने का फैसला किया। इस संबंध में जालसाज उन्हें बार-बार फोन पर ही ऑफिस आने से रोकने के लिए टालमटोल करते रहे। जालसाजी के बारे में स्थानीय पुलिस को बताया तब भी कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसके बाद नोएडा में आकर उन्होंने खुद ही फर्जीवाड़े को लेकर दैनिक भास्कर से संपर्क किया।

इन राज्यों में हो चुकी है ठगी

– यूपी

– बिहार

– उत्तराखंड

– महाराष्ट्र

– छत्तीसगढ़

– ओडीशा

-मध्य प्रदेश

-गुजरात

– झारखंड

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